सरकार अगले बजट (Budget 2024) में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 10.5 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य तय कर सकती है। अगले साल ग्लोबल इकोनॉमी में सुस्ती और करेंट फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू कलेक्शन के हाई बेस के बावजूद सरकार डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में वृद्धि का टारगेट डिजिट में तय कर सकती है। तीन सीनियर सरकारी अधिकारियों ने इस बारे में बताया। इनमें से एक अधिकारी ने मनीकंट्रोल से कहा कि सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में भी डायरेक्ट टैक्स में वृद्धि का पहले जैसा टारगेट तय कर सकती है। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में वृद्धि का लक्ष्य जीडीपी की ग्रोथ से ज्यादा तय होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि FY 2024-25 में टैक्स कलेक्शन में ग्रोथ का 10.5 फीसदी का लक्ष्य व्यवहारिक होगा।
FY2023-24 के लिए 10.5 फीसदी ग्रोथ का लक्ष्य
सरकार ने FY2023-24 के लिए टैक्स कलेक्शन में 10.5 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य तय किया था। सरकार ने बजट में FY24 में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन से 18.2 लाख करोड़ रुपये हासिल होने का अनुमान रखा था। अमेरिका में इनफ्लेशन अब भी 3 फीसदी से ज्यादा है। लेकिन इसके चलते ग्लोबल इकोनॉमी में ज्यादा स्लोडाउन देखने को नहीं मिला है। एक अधिकारी ने कहा कि चाइना प्लस वन स्ट्रेटेजी, स्थिर सरकार और अर्थव्यवस्था की अच्छी सेहत के चलते अगले वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ डबल डिजिट में रहेगी।
करेंट फाइनेंशियल ईयर में ग्रोथ 17-18 फीसदी रहने की उम्मीद
अधिकारियों ने बताया कि इस वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ बजट में तय 10.5 लक्ष्य से ज्यादा रहने की उम्मीद है। यह 17-18 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसकी वजह यह है कि जीएसटी के तहत छोटे बिजनेसेसेज को लाने के उपाय किए गए हैं। दूसरे डिपार्टमेंट के साथ डेटा शेयरिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। इससे कंप्लायंस बढ़ा है। एक अधिकारी ने कहा कि इकोनॉमी बढ़ रही है, जीएसटी कलेक्शन बढ़ रहा है, घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। इसलिए डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की ग्रोथ तय लक्ष्य से ज्यादा रह सकती है।
इकोनॉमी की अच्छी सेहत से बढ़ा कलेक्शन
दुनिया के कई हिस्सों में उथलपुथल की स्थिति है। यूक्रेन पर रूस के हमले शुरू हुए अब दो साल पूरे होने के करीब हैं। उधर, मध्य-पूर्व में इजराइल ने फिलिस्तीन पर हमला किया है। इसके बावजूद इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ अच्छी बनी हुई है। इसका असर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन पर देखने को मिला है। इंडिया में उत्पादन बढ़ रहा है। छोटे बिजनेसेज का प्रदर्शन अच्छा है। टैक्स रीजीम को बेहतर बनाने की लगातार कोशिश हो रही है। टैक्स कंप्लायंस में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल काफी बढ़ा है। इससे भी फायदा हुआ है।