बजट से ज्वेलर्स और बुलियन इंडस्ट्रीज की क्या हैं उम्मीदें

नोटबंदी और जीएसटी के झटकों को झेल चुके ज्वेलर्स को इस बजट से काफी उम्मीदें है।

अपडेटेड Jan 25, 2019 पर 5:08 PM
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केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आखिरी बजट की तारीख नजदीक आ चुकी है। ये कयास लगाया जा रहा है कि चुनावी साल में सरकार लोक लुभावन बजट ला सकती है। इसी वजह से ज्वेलर्स और बुलियन इंडस्ट्रीज को भी इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। वैसे सरकार की ओर से पिछले साढ़े चार साल के दौरान इस सेक्टर को कई उम्मीदें दिखाई गईं। लेकिन ना तो अब तक सबसे बड़ी मांग सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती हो सकी और ना ही पूरे देश में ‍ज्वेलरी हॉलमार्किंग को जरूरी किया जा सका। कड़े रेगुलेशन से ये सेक्टर गिरती बिक्री से जूझ रहा है। लिहाजा पिछले साढ़े चार साल के दौरान एक्साइज ड्यूटी और उसके बाद नोटबंदी और जीएसटी के झटकों को झेल चुके ज्वेलर्स को इस बजट से काफी उम्मीदें है।

ज्वेलर्स और बुलियन इंडस्ट्रीज इस बजट में सरकार से सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की मांग कर रहे है। ज्वेलर्स और बुलियन इंडस्ट्रीज का मानना है कि सरकार को इस बजट में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और आसान किया जाए। वहीं घरेलू गोल्ड माइनिंग को बढ़ावा देने की मांग कर रहे है।  ज्वेलरी क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर चार्ज कम, ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ाने पर फोकस, ज्वेलरी खरीद में कैश ट्रांजैक्शन की सीमा बढ़ाने, गोल्ड और डायमंड इंडस्ट्रीज को अलग करने की मांग कर रहे है।

ज्वेलर्स और बुलियन इंडस्ट्रीज का मानना है कि गोल्ड एक्सचेंज को जल्द शुरू करना जरूरी है। इससे बुलियन बैंक से इंडस्ट्री को राहत मिलेगी। साथ ही सरकार ज्वेलर्स और बुलियन इंडस्ट्रीज को गोल्ड सेविंग अकाउंट की सुविधा दें।

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