विनोद शर्मा ही नहीं, इस वक्त एमएसएमई सेक्टर में सबसे बड़ी समस्या है कारोबार के विस्तार के लिए पैसे जुगाड़ना। कारोबारियों का मानना है कि डिफॉल्ट बड़ी कंपनियां कर रही है लेकिन इसका खमियाजा छोटे कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। छोटे कारोबारियों के संगठन एफआईएसएमई ने अंतरिम बजट से पहले जो मांग पत्र वित्त मंत्री को सौंपा है उसमें विलफुल डिफॉल्टर और नॉन विल्फुल डिफॉल्टर में अंतर समझने और उनकी ट्रैकिंग के लिए गाइडलाइंस लाने की बात कही गई है। दूसरी बड़ी मांग ये है कि इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्टसी एक्ट के तहत एमएसएमई को फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के साथ क्लब किया जाए। साथ ही जीएसटी कंप्लायंस के लिए सरकार को नरम रवैया अपनाने को कहा गया है।