10 जुलाई को वित्त मंत्री अरुण जेटली अपना और मोदी सरकार का पहला आम बजट पेश करेंगे। अरुण जेटली के लिए बजट बनाना चुनौतियों से कम नहीं होगा। इंडस्ट्री, बाजार, निवेशक, आम आदमी सबकी अलग-अलग विश लिस्ट है। लेकिन, हर कोई चाहता है कि सरकार ऐसे कदम उठाए जिससे सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार पकड़े, कारोबार का माहौल सुधरे, रोजगार बढ़े, महंगाई पर लगाम लगे।
मोदी सरकार के पहले बजट में ग्रोथ और डेवलपमेंट, महंगाई, वित्तीय घाटा, निवेश नीति, टैक्स पॉलिसी, रोजगार, इंफ्रा, पावर, मैन्यूफैक्चरिंग, जीएसटी, डीटीसी, बीमार पीएसयू और एफडीआई पर नजर रहेगी। लेकिन कैश बेनिफिट ट्रांसफर, ऑयल एंड गैस रिफॉर्म, फ्यूल सब्सिडी पर किरीट पारिख की सिफारिशें, मनरेगा, खाद्य सुरक्षा बिल, रेल किराया बढ़ाने का फॉर्मूला, इंफ्रा सेक्टर के लिए बनी पॉलिसी और स्किल डेवलपमेंट पॉलिसी यूपीए सरकार के शासन में लाई गई इन तमाम आर्थिक नीतियों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भी मोदी सरकार के बजट में मिलेगा।