कॉरपोरेट इंडस्ट्री को क्या मिला बजट से

बजट में वित्त मंत्री ने जीएसटी और गार के अहम मुद्दों पर स्पष्ट रोडमैप दिया।

अपडेटेड Feb 28, 2015 पर 5:30 PM

बाजार और इंडस्ट्री की नजर जीएसटी और वित्तीय घाटे पर भी थी और बजट में वित्तमंत्री ने इन दोनों अहम मुद्दों पर स्पष्ट रोडमैप दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी 1 अप्रैल 2016 से लागू हो जाएगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि टैक्स कलेक्शन में सुस्ती के बावजूद वे इस साल वित्तीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करेंगे। वित्तीय घाटा घटेगा और चालू साल में वित्तीय घाटा 4.1 फीसदी रह सकता है। टैक्स कलेक्शन में सुस्ती के बावजूद वित्तीय घाटा नहीं बढ़ेगा। अगले तीन साल में वित्तीय घाटा 3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

बजट में रियल जीडीपी 7.4 फीसदी रहने का अनुमान दिया गया है। वित्त वर्ष 2016 में जीडीपी ग्रोथ 8-8.5 फीसदी रहेगी। कुल राजस्व का 62 फीसदी राज्यों को मिलेगा। 4.1 फीसदी वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल करेंगे। 3 साल में वित्तीय घाटा 3 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2016 में वित्तीय घाटा 3.9 फीसदी रहेगा। वित्त वर्ष 2017 में वित्तीय घाटा 3.5 फीसदी रहेगा। सब्सिडी घटाने की बजाए लीकेज कम करेंगे।

इंडस्ट्री के खराब सेंटिमेंट को सुधारना सरकार की सबसे बड़ी चुनौती थी। वित्तमंत्री ने इस बजट में ये काम बखूबी निभाया है। कॉरपोरेट टैक्स को 5 फीसदी कम करके उन्होंने जहां घरेलू सेंटिमेट सुधारने की कोशिश की वहीं गार जैसे विवादित मुद्दों को रोक लगाकर उन्होंने विदेशी निवेशकों का दिल जीतने की कोशिश की। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अगले 4 साल में कॉरपोरेट टैक्स 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने गार को दो साल के लिए टाल दिया है जिससे कि देश में निवेश का सेंटीमेंट खराब न हो।

वित्तमंत्री को अच्छे से पता है कि इकोनॉमी की आखिर दिक्कत क्या है। इसीलिए उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने वाले कई बड़े एलान किए है। इंफ्रा सेक्टर के लिए 70 हजार करोड़ का आवंटन किया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए रेलवे और रोड के आवंटन में बढ़ोतरी की है, वहीं इन क्षेत्रों के प्रोजेक्ट्स के लिए टैक्स फ्री बॉन्ड प्रस्ताव किया है।

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