बजट 2014: इकोनॉमी में सुधार पर जोर

मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में साफ कर दिया कि इकोनॉमी की सेहत से कोई समझौता नहीं होगा।

अपडेटेड Jul 10, 2014 पर 5:30 PM
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मंदी से जूझ रही देश की इकोनॉमी के अच्छे दिन वाले हैं। मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में साफ कर दिया कि इकोनॉमी की सेहत से कोई समझौता नहीं होगा। और अगर इसके लिए कोई कड़वी दवा की जरूरत होगी तो वो इससे भी नहीं हिचकेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में भरोसा जताया कि वो 4.1 फीसदी वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि पुरानी तारीखों से टैक्स वसूलने का कोई इरादा नहीं है। वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि देश 7-8 फीसदी की ग्रोथ जल्द हासिल करेगा।

उम्मीदों का बोझ लेकर सत्ता में आई मोदी सरकार का बजट बोल्ड होगा या बैलेंस्ड- सभी की नजरें इसी बात पर थीं। लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में साफ कर दिया कि उसे आम आदमी की चिंता तो है, लेकिन इकोनॉमी की बेहतरी के लिए सरकार कड़े फैसले लेने से भी नहीं हिचकेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रोथ की गाड़ी को तेज रफ्तार से दौड़ाने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ग्रोथ को जल्द रिवाइव करना होगा। वित्त मंत्री ने साफ कहा कि सरकार इस बजट में ग्रोथ के लिए प्रतिबद्ध है।

इस वित्त वर्ष के दो महीनों में भी लक्ष्य का 45 फीसदी वित्तीय घाटा पूरा हो चुका है। लिहाजा सभी की नजरें थीं कि इस पर वित्त मंत्री क्या कहते हैं। अरुण जेटली ने भरोसा जताया कि 4.1 फीसदी का वित्तीय घाटे का लक्ष्य हासिल हो जाएगा। यही नहीं उन्होंने वित्त वर्ष 2016 के लिए वित्तीय घाटे का लक्ष्य 3.6 फीसदी और 2017 के लिए 3 फीसदी कर दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि आमदनी से ज्यादा खर्च नहीं करना मुनासिब नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि गैर-जरूरी खर्च तुरंत कम किए जाएंगे और सरकार नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने पर फोकस करेगी।

काला धन भी मोदी के मैनिफेस्टो में बड़ा एजेंडा था और वित्त मंत्री ने कहा कि इस पर लगाम लगाने के पूरे उपाय किए जाएंगे। ग्रोथ के रास्ते में सब्सिडी बड़ा स्पीड ब्रेकर है। वित्त मंत्री ने साफ किया कि फूड और ऑयल सब्सिडी जरूरतमंदों को ही दी जाएगी। वित्त मंत्री ने जीएसटी का फॉर्मूला भी इसी साल लाने का भरोसा जताया। यही नहीं पिछली तारीख से टैक्स पर भी उन्होंने सरकार का स्टैंड साफ कर दिया।

इस ऐलान से जाहिर तौर पर विदेशी निवेशकों को काफी राहत मिलेगी। मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में साफ कर दिया कि ग्रोथ उसके एजेंडे में सबसे ऊपर है। संदेश साफ है कि अच्छे दिन तभी आएंगे जब इकोनॉमी दुरुस्त होगी, देश में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के मौके पैदा होंगे।

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