हर साल बजट में कई सारी घोषणाएं होती है, लेकिन सभी पूरी नहीं हो पाती हैं। वित्तमन्त्री निर्मला सीतारामन ने पिछले साल बजट में ऐसी क्या घोषणाएं की जो अभी तक पूरी हो न सकीं आइए जानते हैं।
पिछले बजट में निर्धारित ग्रोथ, विनिवेश, राजस्व वसूली और घाटे का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। निवेश बढ़ाने को लेकर जो उम्मीदें थीं वो अधूरी रह गई हैं। वित्त वर्ष 2019-20 का नोमिनल GDP ग्रोथ का लक्ष्य 12 फीसदी रखा गया था। इसमें पहले से अनुमानित आंकड़ों के मुकाबले महज 7.5 फीसदी ग्रोथ देखने को मिली। इसी तरह वित्त वर्ष 2019-20 में राजस्व वसूली का लक्ष्य करीब 24.5 लाख करोड़ रुपये का था। इस वसूली में भी 2.5 लाख करोड़ रुपये की कमी की आशंका है।
वित्त वर्ष 2019-20 में विनिवेश का लक्ष्य 1.05 लाख करोड़ रुपये रखा गया था। जबकि वास्तविकता ये है कि विनिवेश का 20 फीसदी लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका है। Q4 में खर्च में 2 लाख करोड़ रुपये कमी की आशंका है। सुपररिच टैक्स लगाने के लिए सरचार्ज बढ़ाया गया। 2.5 करोड़ रुपये और 5 करोड़ रुपये से ज्यादा आय पर क्रमश: 3%, 7% सरचार्ज लगाया गया था। भारी विरोध के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया।
इसके अलावा पिछले बजट में ओवरसीज सॉवरेन बॉन्ड लाने, क्रेडिट गारंटी एनहांसमेंट कॉरपोरेशन बनाने और लिस्टेड कंपनी में पब्लिक हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। SEBI को लिस्टेड कंपनी में पब्लिक हिस्सेदारी 25% से 35% बढ़ाने को कहा गया था। सोशल स्टॉक एक्सचेंज के गठन का निर्णय लिया गया था। इसमें सामाजिक, स्वैच्छिक संस्थाओं की लिस्टिंग होनी थी। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से फंड इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन सच्चाई ये है कि अभी तक इसे लागू करने की संभावनाओं का ही अध्ययन हो रहा है। 5 साल में 1,25,000 किमी ग्रामीण सड़क बनाने का लक्ष्य भी पूरा नही हो सका है।