बजट में बैंकों को सीनियर बॉन्ड जारी करने की मंजूरी मिल सकती है। भारतीय बैंकों को अभी भी ऐसे बॉन्ड जारी करने की इजाजत नहीं है। ये सीनियर बॉन्ड 15 साल या उससे ज्यादा अवधि के लिए होंगे। जुटाई रकम का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लोन देने के लिए होगा। इससे बैंकों की एसेट लायबिलिटी में तालमेल होगा।