वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पहले पूर्ण बजट में इरादे तो बड़े बड़े जताए हैं। लेकिन कड़े कदमों के मामले में थोड़ा मायूस करते हैं। बजट में आम आदमी से लेकर इंडस्ट्री तक, सबको खुश करने की कोशिश दिखती है। इंफास्ट्रक्चर में भारी भरकम निवेश का ऐलान भी किया गया है।
सोशल सेक्टर के लिए निवेश भी बढ़ाया गया है। अगले वित्त वर्ष में 3.9 फीसदी के वित्तीय घाटे का लक्ष्य पर लगता है कि ग्रोथ के लिए वो फिस्कल डेफिसिट से समझौता करने को तैयार है। कंपनियों को कॉरपोरेट टैक्स में 5 फीसदी की राहत दी गई है लेकिन वो 4 साल में मिलेगी। आम टैक्सपेयर्स खुश नहीं हुआ है। सरकार के पास सब्सिडी रिफॉर्म का बड़ा मौका था लेकिन वो यहां चूक गई।