Byju's के फाउंडर बायजू रवींद्रन को हुई 6 महीने की जेल, सिंगापुर कोर्ट ने अवमानना मामले में सुनाई बड़ी सजा

Byju Raveendran Jailed: सिंगापुर कोर्ट ने बायजू रवींद्रन के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाते हुए कई निर्देश जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने रवींद्रन को तुरंत संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा है। कोर्ट ने उन पर करीब 59 लाख रुपये का कानूनी खर्च चुकाने का भी आदेश दिया है

अपडेटेड May 27, 2026 पर 9:43 AM
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अदालत का कहना है कि रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों से जुड़े कई अदालती आदेशों का बार-बार उल्लंघन किया है

Byju Raveendran Jailed: एडटेक सेक्टर की दिग्गज कंपनी बायजू के फाउंडर बायजू रवींद्रन की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर की एक अदालत ने बायजू रवींद्रन को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई है।

अदालत का कहना है कि रवींद्रन ने अप्रैल 2024 से अपनी संपत्तियों से जुड़े कई अदालती आदेशों का बार-बार उल्लंघन किया है, जिसके बाद कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है। यह सजा ऐसे समय पर आई है जब रवींद्रन पहले से ही दुनिया के कई देशों में विदेशी निवेशकों और कर्जदाताओं के साथ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

भारी-भरकम जुर्माने के साथ सरेंडर करने का आदेश


सिंगापुर कोर्ट ने बायजू रवींद्रन के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाते हुए कई निर्देश जारी किए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने रवींद्रन को तुरंत संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा है। कोर्ट ने उन पर करीब 59 लाख रुपये का कानूनी खर्च चुकाने का भी आदेश दिया है।

इसके साथ ही उन्हें 'Beeaar Investco Pte' कंपनी के कानूनी मालिकाना हक को साबित करने वाले दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है, जो एक संबंधित इकाई में शेयर रखती है।

हालांकि, अभी यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि रवींद्रन इस समय सिंगापुर में ही मौजूद हैं या किसी अन्य देश में। उनकी तरफ से इस सजा पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कतर के QIA की सब्सिडियरी ने खींचा कोर्ट में

बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत तक घसीटने के पीछे कतर सरकार का हाथ है। रवींद्रन के खिलाफ सिंगापुर के अदालती सिस्टम में यह कानूनी लड़ाई कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) की एक सहायक कंपनी 'कतर होल्डिंग्स' द्वारा लड़ी जा रही है।

कतर के इस सॉवरेन वेल्थ फंड ने बायजू की पैरेंट कंपनी के एक फंडिंग राउंड में हिस्सा लिया था। यह निवेश उस समय किया गया था जब कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही थी और लागत में कटौती में जुटी थी।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कतर होल्डिंग्स की पैरवी नामी लॉ फर्म 'ड्रयू एंड नेपियर' ने की, जबकि 'बायजू इन्वेस्टमेंट' का प्रतिनिधित्व 'फर्वेंट चैंबर्स' ने किया।

अमेरिका में भी चल रहा है 1.2 बिलियन डॉलर का मामला

सिंगापुर में मिली जेल की सजा रवींद्रन के लिए एकमात्र मुसीबत नहीं है, उनका ग्लोबल कानूनी संकट बहुत बड़ा है। अमेरिका में विदेशी कर्जदाता और लेंडर्स बायजू से अपने डूबे हुए 1.2 बिलियन डॉलर यानी लगभग 10000 करोड़ रुपये के टर्म लोन की वसूली के लिए लगातार कानूनी प्रयास कर रहे हैं।

दुनिया के कई अलग-अलग देशों और न्यायक्षेत्रों में विदेशी निवेशक बायजू रवींद्रन के दावों और उनकी वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ अदालती जंग लड़ रहे हैं।

फर्श से अर्श और फिर विवादों के भंवर में बायजू

बायजू रवींद्रन की कहानी भारतीय स्टार्टअप जगत की सबसे नाटकीय कहानियों में से एक रही है। रवींद्रन ने जब एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फर्म 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' (Think & Learn Pvt) यानी Byju’s की स्थापना की थी, तो वह रातोंरात देश के सबसे बड़े अरबपतियों की लिस्ट में शुमार हो गए थे।

भारतीय स्टार्टअप्स की लहर के बीच बायजू दुनिया भर की दिग्गज वैश्विक निवेश फर्मों से भारी-भरकम पूंजी आकर्षित करने वाला सबसे बड़ा 'सक्सेस पोस्टर बॉय' बन गया था।

लेकिन आक्रामक विस्तार, वित्तीय कुप्रबंधन और विदेशी निवेशकों के साथ बढ़ते विवादों के कारण अब कंपनी और खुद बायजू रवींद्रन का भविष्य जेल की सजा और अरबों डॉलर के मुकदमों के बीच बेहद अंधकारमय नजर आ रहा है।

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