HDFC Bank के मुंबई स्थित वर्ली कॉर्पोरेट ऑफिस में मई 2021 में एक टॉप लेवल रिव्यू मीटिंग हुई थी। इसमें मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ शशिधर जगदीशन और चीफ फाइनेंशियल अफसर श्रीनिवासन वैद्यनाथन ने हिस्सा लिया था। इसमें एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी के विलय पर चर्चा हुई। इस मीटिंग में शामिल एक व्यक्ति ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि श्रीनी ने एक व्यापक प्रजेंटेशन पेश किया। डेटा पर चर्चा हुई। आखिर में हर व्यक्ति इस बात से सहमत था कि यह विलय के लिए सही समय है। हर व्यक्ति एचडीएफसी बैंक के पोर्टफोलियो में एचडीएफसी के होम लोन पोर्टफोलियो को शामिल करने के लेकर उत्साहित था। विलय के बाद एचडीएफसी बैंक को हाउसिंग फाइनेंस मार्केट में एंट्री का मौका मिलेगा।
विलय के बाद एचडीएफसी बैंक की होम लोन बुक 7.3 लाख करोड़ रुपये की होगी। यह मार्च 2023 में SBI की 6.4 लाख करोड़ रुपये की होम लोन बुक से ज्यादा है। एचडीएफसी बैंक के अंदर के लोगों का कहना है कि आदित्य पुरी के बाद आए बैंक के बॉस शशीधर जगदीशन का रुख विलय को लेकर ज्यादा उदार था। पुरी 2020 में रिटायर हो गए। उनकी जगह शशीधरन इसके बॉस बने। नेतृत्व में बदलाव के बाद विलय के रास्ते पर आगे पढ़ना आसाना हो गया।
एनबीएफसी के लिए भी सख्त नियम
विलय के ऐलान के बाद अपने पहले एक्सक्लूसिव मीडिया इंटरव्यू में दीपक पारेखन ने मनीकंट्रोल के बताया था कि RBI के नियमों को सख्त बनाने के बाद एनबीएफसी बिजनेस मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ सालों में आरबीआई ने बैंक और एनबीएफसी के नियमों के बीच के अंतर को कम कर दिया है। यह सही है। पिछले कुछ सालों में RBI ने NBFC के लिए बैंकों जैसे सख्त कानून बनाए हैं। कैपिटल, रेगुलेटरी स्क्रूटनी और एसेट के मामले में बड़ी एनबीएफसी को बैंक की तरह माना जाता है। एचडीएफसी 5 लाख करोड़ की लोन बुक के साथ बड़ी एनबीएफसी की कैटेगरी में आती है।
पारेख ने एनबीएफसी के लिए फंड की बढ़ती लागत को भी एक प्रॉब्लम माना था। उन्होंने कहा, "इंडियन डेट मार्केट अभी विकसित नहीं है। एनबीएफसी के लिए बड़ा फंड जुटाना आसान नहीं है। इधर, इंडिया में होम लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए हमें आज से पांच साल बाद की पूंजी की अपनी जरूरत को लेकर अभी से सावधान रहने की जरूरत है। आज हम अच्छी स्थिति में हैं। दो साल बाद भी हम अच्छी स्थिति में रहेंगे। लेकिन, 50 साल बाद क्या होगा, क्योंकि इंडिया में हाउसिंग लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है।"
रेगुलेटरी बाधाएं का निकला समाधान
विलय का फैसला होने के बाद दो मोर्चों पर चैलेंज दिख रहा था। पहला, एचडीएफसी समूह की सब्सिडियरी कंपनियों का क्या होगा और दूसरा प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग की शर्तों का क्या होगा। बैंकों के लिए अपने कुल लोन का 40 फीसदी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को देना जरूरी होता है। 21 अप्रैल को अच्छी खबर आई। HDFC Bank ने बताया कि RBI ने एचडीएफसी बैंक या एचडीएफसी को एचडीएफसी लाइफ और एचडीएफसी एर्गो में अपनी हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा करने की इजाजत दे दी है। इनवेस्टर्स को चिंता सता रही थी कि RBI एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक को एचडीएफसी लाइफ जैसी अपनी सब्सिडियरी कंपनियों में हिस्सेदारी घटाने को कह सकता है।
RBI ने एचडीएफसी बैंक को प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) की शर्तों के पालन के लिए भी करीब तीन साल का समय दे दिया है। वियल की तारीख से 12 महीने बाद ही पीएसएल की शर्त लागू होगी। अगर पहले दिन से ही एचडीएफसी बैंक को इस शर्त के पालन के लिए कहा जाता तो बड़ी दिक्कत हो सकती थी। हालांकि, RBI ने कहा है कि एचडीएफसी बैंक को पहले दिन से ही CRR, SLR और LCR की शर्तों का पालन करना होगा। इन शर्तों के पालन में एचडीएफसी बैंक को किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।