ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) को ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत अपने दूसरे प्रोडक्ट के लिए सर्टिफिकेशन मिला है। यह जानकारी सूत्रों ने मनीकंट्रोल को दी है। सूत्र ने बताया कि ओला इलेक्ट्रिक के S1 Pro (Gen-2) को इस हफ्ते ऑटो PLI स्कीम के तहत डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) सर्टिफिकेट मिला है। इसके साथ ही यह अप्रुवल प्राप्त करने वाला ओला का दूसरा इलेक्ट्रिक स्कूटर बन गया।
S1 Air स्कूटर के लिए भी मिला है DVA सर्टिफिकेट
जनवरी में बेंगलुरु स्थित EV कंपनी को अपने S1 Air स्कूटर के लिए DVA सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ, जिससे यह भारी उद्योग मंत्रालय से स्कीम के तहत एलिजिबिलिटी हासिल करने वाली पहली टू-व्हीलर EV कंपनी बन गई। भारी उद्योग मंत्रालय और ओला इलेक्ट्रिक के प्रवक्ताओं ने इस मामले में भेजे गए ईमेल का अब तक जवाब नहीं दिया है।
5 साल तक स्कीम के तहत Ola Electric को सब्सिडी के लिए पात्रता
सूत्र ने आगे कहा कि कंपनी ने अक्टूबर की दूसरी छमाही में ICAT, मानेसर में S1 Pro के लिए PLI सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया और इसे 9 फरवरी 2024 को सर्टिफिकेश मिल गया। Ola S1 Pro और Ola S1 Air अब सर्टिफिकेशन की तारीख से 5 साल के लिए सरकार की ऑटो पीएलआई स्कीम के तहत सब्सिडी के लिए पात्र हैं।
स्कीम के तहत ओला इलेक्ट्रिक वित्त वर्ष 2023-24 से शुरू होने वाले लगातार पांच वित्तीय वर्षों तक इंसेंटिव के लिए पात्र है। इंसेंटिव प्रोडक्ट्स के तय सेल्स वैल्यू (DSV) के 13 फीसदी से 18 फीसदी के बीच होगा।
Ola Electric ने IPO के लिए किया है आवेदन
दिसंबर में ओला इलेक्ट्रिक ने मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास अपना ड्राफ्ट पेपर दाखिल किया है। इसकी योजना फ्रेश शेयर और OFS के माध्यम से 7250 करोड़ रुपये जुटाने की है। कंपनी ने कहा है कि जुटाई गई राशि में से वह 1226 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए और 800 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने में करेगी।
Ola Electric का क्या है प्लान
भाविश अग्रवाल ने ओला इलेक्ट्रिक की स्थापना साल 2015 की थी। ओला इलेक्ट्रिक ने तमिलनाडु के कृष्णागिरी में एक गीगाफैक्ट्री का निर्माण किया है। इसकी आगे ओला के EV बिजनेस का विस्तार करने और तमिलनाडु में भारत की पहली लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने की योजना है।
Ola Electric का फाइनेंशियल
बैंगलोर स्थित EV कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू FY23 में 2,782 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष से करीब 510 फीसदी अधिक है। लेकिन इसका नेट लॉस बढ़कर 1,472 करोड़ रुपये हो गया, जो FY22 में रिपोर्ट किए गए 784 करोड़ रुपये से दोगुना है।