ISM 2.0 : सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का रास्ता साफ, चिप मैन्युफैक्चरिंग,डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट पर होगा फोकस

India Semiconductor Mission 2.0 : सूत्रों के मुताबिक ISM 2.0 की कुल लागत 1.25 लाख करोड़ रुपए की है। इसमें चिप मैन्युफैक्चरिंग,डिजाइन ओर स्किल डेवलपमेंट पर फोकस होगा। ISM 2.0 में चिप मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम बनाने पर फोकस होगा। चिप के लिए गैस,इंगॉट्स और दूसरे रॉ मैटेरियल बनाने पर जोर होगा

अपडेटेड Jul 14, 2026 पर 3:09 PM
India Semiconductor Mission 2.0 : सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकेगा,जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी

India Semiconductor Mission 2.0 : भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (India Semiconductor Mission 2.0) का रास्ता साफ है गया है। इससे जुड़े सभी मुद्दे सुलझ गये है और सूत्रों के मुताबिक IT मंत्रालय जल्दी ही इस पर कैबिनेट की मंजूरी ले सकता है। सीएनबीसी-आवाज़ के असीम मनचंदा ने सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर बताया है कि ISM 2.0 (India Semiconductor Mission 2.0) जल्द लॉन्च होगा। इसका रास्ता साफ हो गया है। मिशन के बजट से जुड़े सभी मुद्दे सुलझ गए हैं। इसे जल्दी ही कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक ISM 2.0 की कुल लागत 1.25 लाख करोड़ रुपए की है। इसमें चिप मैन्युफैक्चरिंग,डिजाइन ओर स्किल डेवलपमेंट पर फोकस होगा। ISM 2.0 में चिप मैन्युफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम बनाने पर फोकस होगा। चिप के लिए गैस,इंगॉट्स और दूसरे रॉ मैटेरियल बनाने पर जोर होगा। मिशन की समय सीमा 5 साल से बढ़ाकर 12 साल होगी। बता दें कि ISM 1.0 के तहत करीब 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली थी। इसमें से 3 प्रोजेक्ट ने अपने प्रोडक्शन की शुरुआत कर दी है।

बता दें कि इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 (ISM 1.0) करीब 70000 करोड़ रुपए के आसपास का था और इसमें सरकार ने करीबन 12 कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए परमिशन दी थी और उसके तीन कंपनियां ऑलरेडी अपनी मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर चुकी हैं। अब सरकार सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लेकर के आने की तैयारी कर रही है।


सूत्रों के मुताबिक सरकार ISM 2.0 के जरिए सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के पूरे इकोसिस्टम पर फोकस करेगी। इसकी वजह यह कि अगर आप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग करने जा रहे हैं तो आपको एक पूरा इकोसिस्टम बनाना पड़ेगा। उसकी सप्लाई चेन्स मजबूत करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको देश में ही रॉ मटेरियल, इंगोट्स और इसमें इस्तेमाल होने वाली गैसो का भी प्रोडक्शन करना होगा। ऐसा होने पर ही पूरा सेमीकंडक्टर इको सिस्टम तैयार होगा। सरकार ISM 2.0 के जरिए इसी पर फोकस करेगी। बहुत जल्दी ही आप इसको कैबिनेट की मंजूरी मिलते हुई देख सकते हैं। उसके बाद सरकार इस पूरे मिशन को रोल आउट करने की शुरुआत करेगी। ISM 2.0 के तहत कई नई कंपनियां इस स्पेस के अंदर आ सकती है।

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से भारत 2030 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 75 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकेगा,जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा। सरकार नई स्कीम को शुरू करने के लिए मंत्रालयों के बीच बातचीत पहले ही कर चुकी है और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिल चुकी है।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की खपत और उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज भारत में 65 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का सालाना उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। साथ ही, देश एआई-आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी बना रहा है, जिनके लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की जरूरत होती है। मांग और इनोवेशन में इस तेजी की वजह से भारत के लिए ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में अपनी जगह बनाना जरूरी हो गया है।

 

 

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