लो कॉस्ट एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) ने लंबे समय से चली आ रही अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों के सेटलमेंट का ऐलान किया है। इसमें पिछले 10 महीने की प्रोविडेंट फंड बकाया राशि भी शामिल है। एयरलाइन ने हाल में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिये फंड जुटाया है। उसने पुष्टि की है कि एंप्लॉयीज की सभी पेंडिंग सैलरी और गुड्स एंड सर्विसेज (जीएसटी) टैक्स का भुगतान हो चुका है।
स्पाइसजेट के मैनेजमेंट ने का कहना है कि कंपनी का कामकाज सही ट्रैक पर है और उसकी QIP रणनीति में फाइनेंशियल और ऑपरेशनल प्लान की जानकारी दी गई है। कोविड से पहले प्राइवेट सेक्टर की। यह एयरलाइन देश के एविएशन मार्केट में करीब 15 पर्सेंट की हिस्सेदारी रखती थी। इसके बाद धीरे-धीरे कंपनी की हालत बिगड़ने लगी, कंपनी का नकदी संकट बढ़ने लगा और इस समस्या से जूझते-जूझते कंपनी को 5 साल गुजर गए। फिर पिछले महीने कंपनी को बड़ी राहत मिली, जब वह लगभग 3,750 करोड़ रुपए (करीब 50 करोड़ डॉलर) का फंड जुटाने में सक्षम हो गई।
सितंबर में कंपनी को जो 3,750 करोड़ रुपए की जो फंडिंग मिली है, उसकी दरकार उसे लंबे समय से थी। तो अक्सर कंपनी के एम्प्लॉइज के बीच सैलरी ना मिलने से लेकर के छंटनी होने तक की चर्चा गरम रहती थी। इस फंडिंग से कंपनी को अपने लोन की कुछ रकम चुकाने में मदद मिलेगी, लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी पर करीब 8,000 करोड़ रुपए का कर्ज है।