रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) को भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज ने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत 10GWh की एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज कैपिसिटी प्रदान की है। मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज ने आज 4 सितंबर को सफल बोलीदाताओं का ऐलान किया, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज का नाम भी शामिल है। इस पहल से बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता के लिए भारत के प्रयासों को मजबूती मिली और आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
सात कंपनियों से मिली थी बोलियां
सरकार ने कहा कि 10GWh एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए 3620 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके लिए सात कंपनियों से बोलियां प्राप्त हुई थीं। इसमें कहा गया है कि बोली प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनियों में ACME क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, अमारा राजा एडवांस्ड सेल टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, अन्वी पावर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, JSW नियो एनर्जी लिमिटेड, लुकास टीवीएस लिमिटेड, रिलायंस इंडस्ट्रीज और वारी एनर्जीज लिमिटेड शामिल थीं, जिनकी कुल क्षमता 70GWh थी।
सरकार ने आगे कहा कि क्वालिटी और कॉस्ट-बेस्ड सेलेक्शन (QCBS) मैकेनिज्म पर आधारित कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक ओवरऑल स्कोर के साथ सफल बोलीदाता के रूप में उभरी। कंपनी की बोली का मूल्यांकन कंबाइंड टेक्निकल और फाइनेंशियल क्राइटेरिया के आधार पर किया गया था। नतीजतन रिलायंस को इस स्कीम के तहत फुल 10 GWh कैपिसिटी प्रदान की गई है।
जिन पांच कंपनियों को उनकी रैंकिंग के अनुसार वेट लिस्ट में रखा गया है, वे ACME क्लीनटेक सॉल्यूशंस, अमारा राजा एडवांस्ड सेल टेक्नोलॉजीज, वारी एनर्जीज, JSW नियो एनर्जी और लुकास टीवीएस हैं। ACC बैटरी स्टोरेज के लिए PLI स्कीम का मकसद बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल लीडर के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)