Flipkart ने करीब दो हफ्ते पहले Axis Bank से मिलकर लोने देने के लिए एक प्लेटफॉर्म लॉन्च करने का ऐलान किया था। फ्लिपकार्ट की सिस्टर कंपनी और फिनटेक फर्म PhonePe ने एक महीने से कम समय पहले कारोबारियों के लिए एक मार्केटप्लेस लॉन्च किया था। यूनिफायड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) में फोनपे मार्केट लीडर है। इसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 47 फीसदी है। Flipkart अब अपना यूपीआई पेमेंट प्लेटफॉर्म लॉन्च करने के बारे में सोच रहा है। पहले से उसका यूटिलिटी पेमेंट प्लेटफॉर्म्स हैं और वह इन पर काफी इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स बेचती है। इन प्लेटफॉर्म्स पर होटल, बस और ट्रेन टिकट्स और फ्लाइट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह मजेदार बात यह है कि फ्लिपकार्ट Cleartrip का इस्तेमाल करती है। उसने 2021 में इन सर्विसेज के लिए क्लियरट्रिप को खरीदा था। PhonePe बतौर पार्टनर Makemytrip का इस्तेमाल करती है।
फोनपे ने लॉन्च किया ईकॉमर्स ऐप पिनकोड
इस साल अप्रैल में फोनपे ने सरकार के नॉन-प्रॉफिट प्लेटफॉर्म ONDC पर ईकॉमर्स ऐप Pincode लॉन्च किया था। हालांकि, इसका सीधा मुकाबला फ्लिपकार्ट से नहीं है, लेकिन ऐसा ऐसा लगता है है कि इन कंपनियों का आपस में प्रतियोगिता है। Flipkart और PhonePe में अमेरिकी रिटेल कंपनी Walmart की आधा से ज्यादा हिस्सेदारी है। पहले PhonePe फ्लिपकार्ट की सब्सिडयरी थी। लेकिन, यह दिसंबर 2022 में फ्लिपकार्ट से अलग हो गई। अब फोनपे में फ्लिपकार्ट की कोई हिस्सेदारी नहीं है। फोनपे में अब वॉलमार्ट से बाहर के निवेशकों का निवेश है, जिनका अनुमान है कि फोनपे एक दिन फ्लिपकार्ट से बड़ी कंपनी बन जाएगी।
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समीर निगम ने दो लोगों के साथ मिलकर शुरू की थी फोनपे
Praxis Global Alliance के सीईओ और मैनेजिंग पार्टनर मधुर सिंघल ने कहा, "Flipkart का मुकाबला Amazon से भी है। दोनों की सर्विससेज एक जैसी हैं। दोनों अलग-अलग कंपनियां है और इनमें किसी तरह का संबंध नहीं है। अलग इनवेस्टर्स और अलग स्ट्रेटेजीज के बावजूद इनके प्रोडक्ट्स और सर्विसेज आपस में टकराती हैं।" फ्लिपकार्ट ने 2011 में मीडिया डिस्ट्रिब्यूशन स्टार्टअप MIME360 को खरीदा था। इस स्टार्टअप की शुरुआत समीर निगम, बर्जिन इंजीनियर और राहुल चारी ने की थी। तीनों एग्जिक्यूटिव्स ने उसके बाद फ्लिपकार्ट में सीनियर पदों पर काम करना शुरू किया था। तीन साल बाद उन्होंने डिजिटल पेमेंट ऐप PhonePe शुरू करने के लिए फ्लिपकार्ट से बाहर चले गए थे।
फ्लिपकार्ट ने फोनपे के फाउंडर्स को साथ आने के लिए मनाया था
फोनपे डिजिटल वॉलेट स्पेस की बड़ी कंपनियों से मुकाबले के लिए पैसे जुटाना चाहती थी। लेकिन, फ्लिपकार्ट अपनी मौजूदगी पेमेंट प्लेटफॉर्म स्पेस में चाहती थी। इसके लिए उसने फोनपे के फाउंडर्स को फिर से फ्लिपकार्ट का हिस्सा बनने के लिए मनाना शुरू किया। उसने फोनपे के फाउंडर्स पर्याप्त फंडिंग कंपनी चलाने में पूरी आजादी देने का भी वादा किया। फोनपे का स्ट्रक्चर फ्लिपकार्ट से अलग रखा गया। इसके एंप्लॉयीज अलग आईडी कार्ड्स का इस्तेमाल करते थे।
एक होने के बाद भी दोनों की पहचान अलग-अलग थी
निगम ने हाल में मनीकंट्रोल को एक इंटरव्यू के दौरान बताया, "सच्चाई यह है कि बोर्ड और सभी इनवेस्टर्स यह समझते हैं और इसकी तारीफ करते हैं कि हम अलग कंपनी हैं और हमारा बिजनेस अलग है। इसलिए हमें अपना रास्ता खुद तय करने का अधिकार है। अब अगर इसका मतलब यह है कि हम कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करेंगे तो ऐसा है।" फ्लिपकार्ट और फोनपे ने इस खबर के बारे में अपनी टिप्पणी नहीं दी।
फोनपे ग्रोथ का ग्रोथ पर फोकस
फोनपे के एक फाउंडर और कई यूनिकॉर्न में निवेश कर चुके एक शख्स ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, "अब फोनपे के मालिक आजाद हैं। उनका भविष्य भी अलग दिख रहा है। लेकिन, रास्ते एक दूसरे से टकरा रहे हैं, क्योंकि दोनों कंपनियां ग्रोथ हासिल करना चाहती हैं।" फ्लिपकार्ट की बाजार हिस्सेदारी ऑफलाइन रिटेल में बढ़ रही है। लेकिन, पिछले कुछ सालों में इसकी रफ्तार सुस्त हुई है।