Notes from Kota: इंडिया के कोचिंग कैपिटल में लौटने लगी है रौनक, एडुटेक कंपनियां भी खोल रहीं सेंटर्स
एडुटेक कंपनियां और पुराने कोचिंग इस्टीट्यूट्स के बीच प्रतिद्वंद्विता से कोटा को फिर से नई जिंदगी मिलती दिख रही है। एक अनुमान के मुताबिक कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में इस साल 3,00,000 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने दाखिला लिए हैं
MoneyControl News
अपडेटेड Jul 26, 2022 पर 5:11 PM
कोटा में दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे होती है। छोटा टी स्टॉल भी सुबह 5:45 बजे खुल जाता है।
देश के ज्यादातर शहरों में मूवीज और क्रिकेट को लेकर लोगों की जबर्दस्त दीवानगी दिख सकती है, लेकिन कोटा में नहीं। राजस्थान का यह शहर चंबल नदी के किनारे बसा है। सड़कों पर आपको फिल्म स्टार्स की जगह मोटिवेशनल कोट्स के साथ आपको ऑल इंडिया रैंक (AIR) होल्डर्स के फोटो दिख जाएंगे। उनके साथ उनके टीचर्स के फोटो भी नजर आएंगे।
आपको अपने आसपास अलग-अलग कोचिंग इंस्टीट्यूट्स की रंगबिरंगी टी-शर्ट्स पहने बच्चे दिखेंगे। करीब हर गली में आपको हॉस्टल्स, मेस, लाइब्रेरी और फूड स्टॉल्स मिल जाएंगे, जो स्टेशनरी आइटम्स भी बेचते हैं। 'Path to Success', 'Educating for a Better Tomorrow' और 'Nurturing Through Education' ऐसे कुछ मिशन स्टेटमेंट्स हैं, जो कोटा में दाखिल होते ही आपको नजर आते हैं। ये Resonance Eduventures, Motion Classes और Allen Career Institute की मशहूर टैगलाइंस हैं। इन कोचिंग सेंटर्स ने पिछले कुछ सालों में कोटा में अपने पैर जमाए हैं।
इन कोचिंग इंस्टीट्यूट्स ने कोटा को देश को ऐसा केंद्र बना दिया है, जहां देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने के इच्छुक स्टूडेंट्स एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने के लिए आते हैं। पिछले कुछ महीनों में इन पुराने कोचिंग संस्थानों और एडुटेक कंपनियों के बीच जबर्दस्त लड़ाई शुरू हो गई है। Unacademy और PhysicsWallah जैसी एडुटेक कंपनियों ने कोटा में सेंटर्स खोले हैं। वे कोटा में एंट्रेस टेस्ट की तैयारी के लिए आने वाले स्टूडेंट्स को अट्रैक्ट करना चाहते हैं।
1990 के दशक की शुरुआत तक कोटा की पहचान एक इंड्स्ट्रियल शहर के रूप में रही। यहां टेक्सटाइल्स, केमिकल्स, स्टील और पावर सहित कई तरह की इंडस्ट्रीज हैं। यहां के लोगों का कहना है कि 1991 में आर्थिक उदारीकरण शुरू होने के बाद लोकल इंडस्ट्री को नुकसान होना शुरू हो गया। कई लोगों की नौकरियां चली गईं। उसी समय बंसल क्लासेज और एलेन कैरियर इंस्टीट्यूट को यहां कोचिंग के क्षेत्र में कारोबारी संभावनाएं दिखने लगीं।
विनोद कुमार बंसल ने सबसे पहले कोटा में कोचिंग इंस्टीट्यूट की शुरुआत की। बंसल ने आईआईटी बीएचयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने 1983 तक JK Synthetics में नौकरी की। उन्हें मांसपेशियों की एक दुलर्भ बीमारी होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें पूरे समय काम नहीं करने की सलाह दी।
पढ़ाने में दिलचस्पी रखने वाले बंसल ने 1983 में अपने घर में बच्चों को कोचिंग देना शुरू कर दिया। वह मैथ्स पढ़ाते थे। एक स्टूडेंट के आईआईटी एग्जाम क्लियर करने के बाद 1985 में बंसल क्लासेज की तकदीर बदल गई। उनके पास आसपास के जिलों के स्टूडेंट्स आने लगे। फिर 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में कुछ और स्टूडेंट्स आईआईटी एंट्रेस एग्जाम में सफल रहे। इसके बाद कई टीचर्स ने अपने कोचिंग क्लास शुरू कर दिए। उन इंस्टीट्यूट्स ने 12वीं के बोर्ड एग्जाम के लिए लोकल सेकेंडरी स्कूलों से समझौता किए। स्टूडेंट्स को यह बताया गया उन्हें सिर्फ एट्रेंस एग्जाम पर फोकस करना है, उन्हें 12वीं को बोर्ड एग्जाम की चिंता नहीं करनी है।
कुछ ही सालों में इन कोचिंग सेटर्स की इनकम करोड़ों रुपये में पहुंच गई। देशभर से स्टूडेंट्स कोटा आने लगे। 2019 में इस शहर में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले करीब 1,50,000 स्टूडेंट्स थे। लेकिन, मार्च 2020 में देश में लॉकडाउन का ऐलान होते ही कोटा की जिंदगी एक तरह से रुक गई।
आज एडुटेक कंपनियां और पुराने कोचिंग इस्टीट्यूट्स के बीच प्रतिद्वंद्विता से कोटा को फिर से नई जिंदगी मिलती दिख रही है। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स फिजिकल कोचिंग सेंटर्स में लौटने लगे हैं। हॉस्टल ओनर्स और टीचर्स के मुताबिक, इस साल करीब 3,00,000 स्टूडेंट्स आ रहे हैं। कोटा में फिजिक्स के मशूहर टीचर मोहित भार्गव ने कहा यह साल कोटा के लिए रिकॉर्ड तोड़ साल है।
कोटा में एक स्टूडेंट एक साल में औसतन 1.5 लाख रुपये खर्च करता है। एक अनुमान के मुताबिक कोटा के कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में इस साल 3,00,000 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने दाखिला लिए हैं। इस तरह कुल रकम 5,000 करोड़ रुपये पहुंच जाती है। मोशन क्लासेज के सीईओ नितिन विजय ने कहा कि एडुकेटर्स को लगता है कि आने वाले सालों में स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि Unacademy और PhysicsWallah के यहां सेंटर्स खोलने से इसकी पुष्टि होती है।
कोटा में दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे होती है। छोटा टी स्टॉल भी सुबह 5:45 बजे खुल जाता है। ज्यादातर दुकानें शाम 5 बजे तक बंद रहती हैं, क्योंकि ज्यादातर स्टूडेंट्स इस दौरान क्लासेज या लाइब्रेरी में होते हैं। दुकाने शाम में खुलती है और रात 10 बजे तक खुली रहती हैं।
जहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स कोटा के मौहाल से पढ़ाई के लिए प्रेरित होते हैं वहीं कुछ स्टूडेंट्स दबाव भी महसूस करते हैं। 17 साल के एक स्टूडेंट ने बताया, "आप ऐसे शहर में रहने की कल्पना कीजिए जहां हर आदमी आपसे सिर्फ पढ़ने, मार्क्स और रैंक्स के बारे में बात करता है।" मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कोटा में स्टूडेंट्स के सुसाइड करने की खबरें आती रहती हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ अप्रैल में कोटा में 4 मौतें होने की बात सामने आई। 2013 से 2017 के बीच करीब 60 स्टूडेंट्स कोटा में सुसाइड कर चुके हैं।