अमेरिकी इनवेस्टमेंट फर्म टाइगर ग्लोबल (Tiger Global) के प्राइवेट इक्विटी हेड स्कॉट श्लीफर (Scott Shleifer) के इस्तीफे से शॉर्ट टर्म में भारत के टेक्नोलॉजी इनवेस्टर्स के प्लान को झटका लग सकता है। हालांकि, पोर्टफोलियो फाउंडर्स और वेंचर कैपिटल फंड्स का मानना है कि इस इस्तीफे के बाद भी देश की स्टार्टअप्स को लेकर कंपनी का उत्साह बना रहेगा और लॉन्ग टर्म में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
न्यूयॉर्क की इस इनवेस्टमेंट फर्म ने ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) की शुरुआती फंडिंग की थी और इससे उसे काफी फायदा भी हुआ था। पिछले कुछ साल में टाइगर ग्लोबल भारतीय टेक स्टार्टअप्स के प्रमुख इनवेस्टर के तौर पर उभरकर सामने आया है। भारतीय टेक स्टार्टअप्स को फंड करने वाली बाकी इकाइयों में सॉफ्टबैंक (SoftBank), प्रोसस (Prosus) और टेमासेक (Temasek) आदि शामिल हैं।
वेंचर कैपिटल (VC) फर्म 8i वेंचर्स के फाउंडिंग पार्टर विक्रम सी (Vikram Chachra) ने बताया, 'यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि स्टॉक के इस्तीफे से भारतीय मार्केट पर असर पड़ेगा। मुझे लगता है कि बड़ा सवाल पीई/वीसी स्पेस पर फोकस को लेकर है, क्योंकि स्कॉट इसे देख रहे थे। मुझे लगता है कि कुल मिलाकर पीई/वीसी को लेकर मामला सुस्त चल रहा था। अगर टाइगर ग्लोबल पीई/वीसी बिजनेस को लेकर सक्रिय रहता है, तो भारत इसके फोकस में रहेगा। उसका यहां मजबूत ब्रांड है।'
वेंचर इंटेलिजेंस के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से अब तक टाइगर ग्लोबल और बाकी इनवेस्टर्स भारत की स्टार्टअप्स में 228 डील के तहत 21 अरब डॉलर निवेश कर चुके हैं। टाइगर ग्लोबल ने देश की कुल 103 यूनिकॉर्न में से 38 की फंडिंग की है। टाइगर ग्लोबल की फंडिंग हासिल करने वाली एक स्टार्टअप के फाउंडर ने नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया, 'अगर तर्कसंगत ढंग से देखा जाए, तो स्कॉट के कंपनी छोड़ने के बाद कुछ भी नहीं बदलना चाहिए, क्योंकि यह एक बड़ा संस्थान और यहां सिर्फ स्कॉट की नहीं चलती थी।'