Market Fraud: स्टार्टअप का आरोप, IPO से जुटाए पैसों को लेकर भाग गया इनवेस्टमेंट बैंकर

शेयर बाजार फ्रॉड से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है, BSE पर लिस्टेड एक स्टार्टअप ने अपने इनवेस्टमेंट बैंकर पर IPO से जुटाए पैसों के गबन का आरोप लगाया है

अपडेटेड May 23, 2022 पर 6:40 PM
Trekkingtoes.com ने अगस्त 2020 में अपना IPO लॉन्च किया था

शेयर बाजार फ्रॉड से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड एक स्टार्टअप 'Trekkingtoes.com' ने आरोप लगाया है कि उसने अपने इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए जिस फर्म को इनवेस्टमेंट बैंकर के तौर पर नियुक्त किया था, वह IPO से जुटाए अधिकतर पैसों को लेकर भाग गई है।

Trekkingtoes.com ने बीते 13 अप्रैल को BSE को भेजी सूचना में बताया कि कंपनी की तरफ से IPO के जरिए जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा GYR कैपिटल एडवाइजर्स (पूर्व में अल्फा न्यूमेरो सर्विसेज) ने गलत तरीके से गबन कर लिया है।

जयपुर मुख्यालय वाली Trekkingtoes.com, एक नए जमाने की डिजिटल स्टार्टअप है जो एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए किराए पर कैब सर्विस मुहैया कराती है। कंपनी ने अगस्त 2020 में अपना IPO लॉन्च किया था और इसके जरिए 4.54 करोड़ रुपये जुटाए थे। Trekkingtoes.com ने कहा, "हमने धोखाधड़ी के जरिए IPO की रकम हासिल करने को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।"


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Trekkingtoes.com ने इस मामले में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से फास्ट ट्रैक फिनसेक (जिसके पूर्व डायरेक्टर अल्फा न्यूमेरो के डायरेक्टर हैं), फास्ट ट्रैक के डायरेक्टरों- अभिषेक विजय कुमार शर्मा और रोहित पारीक, अल्फा न्यूमेरो के डायरेक्टर मोहित बैद और तीन अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

क्या है पूरा मामला?

साल 2020 में, Trekkingtoes.com के फाउंडर्स- साहिल अग्रवाल और सागर अग्रवाल से फास्ट्र ट्रैक फिनसेक ने संपर्क किया था और उन्हें IPO लाने का आइडिया दिया था। फास्ट्र ट्रैक फिनसेक, सेबी के साथ कैटेगरी-1 मर्चेंट बैंकर के तौर पर रजिस्टर्ड है।

फास्ट ट्रैक ने दोनों फाउंडरों को विश्वास दिलाया कि वह बाजार से पैसे जुटाने में उनकी मदद कर सकती है, जिसकी इस्तेमाल वह बिजनेस को बढ़ाने में कर सकते हैं। अभी तक दोनों फाउंडर्स बिजनेस बढ़ाने के लिए खुद के पास से, उधार लेकर या दोस्तों व परिवार के सदस्यों से निवेश के तौर पैसे लेकर लगा रहे थे।

दोनों फाउंडर्स को तब शेयर बाजार के नियमों को लेकर उतनी समझ नहीं थी। हालांकि उन्हें फास्ट ट्रैक की सलाह अच्छी लगी और उन्होंने उनके साथ अपना आईपीओ लॉन्च किया। आईपीओ के समय कंपनी ने बताया कि वह इस इश्यू से मिले पैसों का इस्तेमाल नए इनीशिएटिव को शुरू करने, कर्ज को घटाने और दूसरे सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

हालांकि Trekkingtoes.com को तब बड़ा झटका लगा, जब उन्होंने इस इश्यू के बैंकर, ICICI बैंक के साथ हुए समझौते को ध्यान से देखा। कंपनी ने बताया, "यह पहली बार था जब बैंकर के इश्यू एग्रीमेंट से कंपनी को पता चला कि वह IPO की आय से केवल 40-45 लाख रुपये का इस्तेमाल करने की हकदार हैं।"

Trekkingtoes.com के अनुसार, इनवेस्टमेंट बैंकर्स ने फाउंडर्स को रणनीतिक निवेश या असुरक्षित लोन के जरिए उनके द्वारा सुझाई गई फर्मों में करीब 4 करोड़ रुपये का निवेश करने की हामी भरने पर मजबूर किया।

Trekkingtoes.com ने कहा, "प्रतिवादी नं. 3 (अभिषेक शर्मा) ने कहा कि अगर हम प्रतिवादी नंबर 1 (फास्ट ट्रैक फिनसेक) की नई और मनमानी व्यवस्था को नहीं मानते हैं तो प्रतिवादी नंबर 1 और कंपनी के बीच पूरा समझौता टूट जाएगा और आईपीओ भी लॉन्च होने से पहले ही विफल हो जाएगा।"

Trekkingtoes.com ने आगे कहा कि चूंकि उसके फाउंडर्स ने अपने उधारदाताओं से पैसा चुकाने को वादा कर लिया था और कर्मचारियों को भी IPO के बारे में बताया था, ऐसे में उन्हें "कारोबारी दबाव" के तहत इन मनमानी शर्तों को मानने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इसके अलावा, फास्ट ट्रैक फिनसेक ने फाउंडर्स को आश्वासन दिया कि उसने जिन कंपनियों में निवेश का सुझाव दिया है, उनके बारे में उसने अच्छे तरीसे जांच-पड़ताल की है और Trekkingtoes.com को "इन कंपनियों में निवेश करने पर उचित ब्याज के साथ भुगतान किया जाएगा और इसी पूरी व्यवस्था में कंपनी को किसी भी तरह का कोई घाटा नहीं होने वाला है।"

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