फाइनेंस बिल 2023 में Angel Tax सिस्टम में बदलाव के प्रस्ताव से स्टार्टअप्स को किसी तरह की राहत नहीं मिली है। 1 फरवरी, 2023 को पेश बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एंजल टैक्स सिस्टम में बदलाव का प्रस्ताव पेश किया था। तब कहा गया था कि इस बदलाव की वजह से स्टार्टअप्स को विदेश से फंड जुटाने में दिक्कत आ सकती है। 24 मार्च को लोकसभा में पारित फाइनेंस बिल में कहा गया है कि एंजल टैक्स में बदलाव फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में लागू हो जाएगा। 3One4 Capital के मैनेजिंग पार्टनर सिद्धार्थ पई ने कहा कि यह कनफ्यूजन था कि यह बदलाव 1 अप्रैल, 2023 से लागू होगा या 1 अप्रैल, 2024 से। लेकिन, फाइनेंश बिल 2023 में साफ तौर पर कहा गया है कि यह 1 अप्रैल, 2023 से लागू होगा।
स्टार्टअप्स पहले से ही फंड की कमी का सामना कर रहे हैं। एंजल टैक्स में बदलाव के प्रस्ताव से उनकी दिक्कत और बढ़ जाएगी। एंजल टैक्स रीजीम के तहत विदेशी इनवेस्टर्स से जुटाए गए फंड पर एग्जेम्प्शन की सुविधा खत्म कर दी गई है। हालांकि, सेबी-रजिस्टर्ड अल्टरनेविटव इनवेस्टमेंट फंड्स की तरफ से किए जाने वाले इनवेस्टमेंट पर एग्जेम्प्शंस मिलता रहेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए नियम से SoftBank, Tiger Global, Alpha Wave और Sequoia जैसे बड़े विदेशी निवेशकों के स्टार्टअप्स में होने वाले निवेश पर बहुत खराब असर पड़ेगा।
दो तरह के इनवेस्टर्स को एग्जेम्प्शन मिलेगा
पई ने कहा, "स्टार्टअप्स इकोसिस्टम की एग्जेम्प्शंस से जुड़ी उम्मीद अब भी खत्म नहीं हुई है। केंद्र सरकार के पास नोटिफिकेशंस के जरिए इसमें बदलाव करने का अधिकार है। उम्मीद है कि यह नोटिफिकेशन 1 अप्रैल, 2023 से पहले जारी हो जाएगा ताकि मौजूदा फंडंगि राउंड्स पर किसी तरह का असर नहीं पड़े।" उन्होंने कहा कि फाइनेंस बिल 2023 पारित हो जाने के बाद अब साफ हो गया है कि विदेशी निवेशकों के निवेश पर एंजल टैक्स लागू होगा। सिर्फ दो तरह के निवेशकों को इस टैक्स से छूट हासिल है। इनमें पहला सेबी-रजिस्टर्ड CAT1 और II AIF है। दूसरा, IFSCA-registered CAT I and II AIFs है।
एंजल टैक्स रीजीम की शुरुआत 2013 में हुई थी। इसका मकसद मनी लाउन्ड्रिंग पर अंकुश लगाना था। इसमें कहा गया है कि स्टार्टअप अगर अपने शेयरों की फेयर वैल्यू से ज्यादा वैल्यूएशन पर फंड जुटाता है तो उस पर टैक्स लगेगा। एंजल टैक्स के मामले में शेयरों के वैल्यूएशन का मामला बहुत अहम रहा है। इडस्ट्री बॉडी ने वैल्यूएशन तय करने के नियमों से जुड़े एंजल टैक्स के प्रावधानों में बदलाव की मांग की थी। इंडस्ट्री का मानना है कि पहले से ही स्टार्टअप्स को फंड के मामले में मुश्किल आ रही है। इस नियम के लागू होने के बाद यह दिक्कत और बढ़ जाएगी।