स्टार्टअप्स (Startups) को नए ग्राहकों को हासिल करने की लागत घटानी चाहिए। साथ ही उन्हें विज्ञापनों पर पैसा बहाने की जगह ऑर्गेनिक तरीके से पैसे बनाने पर फोकस करना चाहिए। ऐसा करके ही वे फंडिंग की कमी की समस्या से बाहर निकल सकती है। इंफोसिस (Infosys) के चेयरमैन नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं, जो 15 अगस्त को पहली बार प्रकाशित हुआ था।
नीलेकणि ने कहा, "एक चीज निश्चित तौर पर हुआ है और इसे मैं खुद कई कंपनियों को देखकर कह सकता हूं कि नए ग्राहकों को जोड़ने के लिए दिल खोलकर पैसे खर्च किए जा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर आपके ग्राहकों को हासिल करने की लागत अधिक रहती है क्योंकि आपने विज्ञापनों और ऐसी दूसरी चीजों पर काफी पैसा खर्च किया है, तो जाहिर है कि आपकी ऑर्गेनिक ग्रोथ कम रहेगी और आप कम निवेशकों की निगाह में आओगे। हर 50 लोग पर एक आपका ग्राहक बनता है। अब जो आपके कस्टमर बनता है, उसमें से सिर्फ 20 फीसदी ही आगे भी आगे साथ बना रहता है। इसलिए यह तरीका इतना कठिन है, कि वहां पैसा कमाना बहुत मुश्किल है।"
उन्होंने एडटेक यूनिकॉर्न फिजिक्सवाला (PhysicsWallah) का हवाला देते हुए बताया कि कैसे उसके फाउंडर और सीईओ अलख पांडे ने खुद के बनाए वीडियो पर फोकर कर ग्राहकों को जोड़ने की लागत कम रखा। जबकि इसके मुकाबले बायजूस, अनएकेडमी और वेदांतु जैसी इसकी प्रतिद्वंदी कंपनियों टेलीविजन और विज्ञापन के दूसरे माध्यमों पर लाखों-करोड़ों खर्च किए।
नीलेकणि ने कहा, "फंडिंग को लेकर मौजूदा कमजोर हालात सहित किसी भी परिस्थिति में पैसा बनाना ही सबसे अच्छा बचाव है।" इंफोसिस के को-फाउंडर और चेयरमैन नंदन नीलेकणि की स्टार्टअप और यूनिकॉर्न के मुनाफे को लेकर यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पूरा स्टार्टअप इकोसिस्टम फंडिंग की कमी की चुनौती से जूझ रहा है।
उन्होंने आगे कहा, "आज लोग कहते हैं कि हमें तेजी से ग्रोथ करना होगा। इसलिए हम ग्रोथ करते समय तक घाटा बनाते रहते हैं। ठीक है कि इसके पक्ष में कुछ दलील दिए जा सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कारोबार के शुरुआत में यूनिट इकोनॉमिक्स को सही करने पर बिल्कुल ध्यान नहीं देंगे। यह आपकी पूंजी का किफायती तरीके से और बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करने के बारे में भी है।"