यूपी-बिहार से मॉनसून की बेरुखी, क्या होगा असर

यूपी और बिहार, खेती के लिहाज से दो अहम प्रदेश बारिश को तरस गए हैं।

अपडेटेड Jul 19, 2018 पर 11:47 AM
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मॉनसून सीजन का 1.5 महीने से ज्यादा खत्म हो चुका है। लेकिन यूपी और बिहार, खेती के लिहाज से दो अहम प्रदेश बारिश को तरस गए हैं। इन दोनों ही राज्यों के ज्यादातर इलाकों में इस साल बेहद कम बारिश हुई है। पश्चिमी यूपी जो आमतौर पर बेहद सम्पन्न माना जाता है, इस सीजन एक जून से 18 जुलाई तक यहां से सामान्य से 45 फीसदी कम बारिश हुई है। जबकि पूर्वी यूपी में सामान्य से 47 फीसदी कम बारिश हुई है। यही हाल बिहार का है, यहां भी सामान्य से 46 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

यूपी में जहां 30 जिले सूखे के कगार पर हैं, वहीं बिहार में 33 जिलों में त्राहिमाम मचा हुआ है। सवाल ये है कि कैसे होगी खेती और कैसा रहेगा कमोडिटी बाजार। साथ ही अगर यही हाल रहा तो कैसे बढ़ेगी किसानों की आय। हालांकि यूपी सरकार हालात के आकलन में जुटी है। यूपी में खरीफ की खेती करीब 30 फीसदी गिरी है।

उत्तर प्रदेश में पूरे पूर्वांचल में सूखे जैसे हालात हैं। पूर्वांचल के सभी जिलों में 90 फीसदी तक कम बारिश। धान और दाल की खेती का बुरा हाल है। प्रदेश में खरीफ की बुआई में गिरावट आई है। किसान बोई जा चुकी फसल को बचाने में जुटे हैं। जबकि कृषि निदेशालय रिपोर्ट बनाने में जुटा है।

बिहार में 19 फीसदी कम या ज्यादा बारिश सामान्य के दायरे में आती है। बिहार के 33 जिलों में सामान्य से बेहद कम बारिश हुई है। बिहार के सिर्फ 5 जिलों में अच्छी बारिश हुई है। पटना और आसपास में बेहद कम बारिश हुई है। बिहार सरकार हालात पर नजर रख रही है। बिहार सरकार को 22 जुलाई के अनुमान पर नजर है। मौसम विभाग को 22 जुलाई तक बिहार में बारिश की उम्मीद है।

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