Commodity Market: भारी बारिश से फसलों को हुआ नुकसान, मूंग और उड़द की कीमतों में 4-5% तेजी संभव

सतीश उपाध्याय का कहना है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक में बारिश से 5-10% तुअर की फसल को नुकसान की आशंका है। महाराष्ट्र में तुअर की फसल चौथे स्थान पर आती है। मूंग, उड़द की फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। तुअर की फसल को पकने में 2-2.5 महीने का वक्त है।

अपडेटेड Aug 21, 2025 पर 3:27 PM
महाराष्ट्र में मॉनसून ने किसानों की मेहनत की पर पानी फेर दिया है। 20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा के क्षेत्र में बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

महाराष्ट्र में मॉनसून ने किसानों की मेहनत की पर पानी फेर दिया है। 20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा के क्षेत्र में बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। भारी बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। महाराष्ट्र के 19 जिलों में नुकसान हुआ। 20.12 लाख हेक्टेयर में नुकसान हुआ। 9 से 20 अगस्त तक भारी बारिश हुई। नांदेड़, मराठवाडा में 35% क्षेत्र में नुकसान हुआ। 7 लाख एकड़ में फसल को नुकसान हुआ। वाशिम, विदर्भ में भी भारी नुकसान हुआ। सरकार नुकसान का जायजा ले रही है।

महाराष्ट्र के नांदेड़ में 7.1 लाख एकड़ की फसल नुकसान का अनुमान हुआ। महाराष्ट्र के वाशिम 4.1 लाख एकड़ में फसल को नुकसान हुआ है।

मूंग और उड़द की कीमतों में 4-5% तेजी संभव 


IPGA सेक्रेटरी सतीश उपाध्याय का कहना है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक में बारिश से 5-10% तुअर की फसल को नुकसान की आशंका है। महाराष्ट्र में तुअर की फसल चौथे स्थान पर आती है। मूंग, उड़द की फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। तुअर की फसल को पकने में 2-2.5 महीने का वक्त है। वहीं मूंग की फसल भी 60-70 दिन में तैयार होने वाली है। उड़द की फसल कटाई के लिए तैयार थी।

तअर की अपेक्षा मूंग, उड़द को ज्यादा नुकसान पहुंचा। दोनों की बुआई कम थी। उड़द की फसल कटाई के लिए तैयार थी। मूंग भी 60-70 दिन में तैयार होने वाली फसल है। बेमौसम बारिश से ही किसान उड़द की खेती से हट रहे हैं।

सतीश उपाध्याय ने आगे कहा कि देश में अभी भी दालों की सप्लाई में कोई कमी नहीं है। जिसके चलते कीमतें रेंजबाउड रह सकती है। अगर सरकार येलो पीस बैन करती है तो मूंग और उड़द की कीमतों में 4-5% तेजी आ सकती है। हालांकि ज्यादा कीमतों में तेजी की उम्मीद नहीं है।

बिरदीचंद अमरचंद लाहोटी ट्रेडिंग पार्टनर ब्रिजेश लाहोटी का कहना है कि मक्के की फसल को बारिश से नुकसान कम और फायदा ज्यादा हुआ। बीते 20 दिन बारिश न होने से मक्के को नुकसान की आशंका थी। थोड़े नुकसान के बाद भी मक्के का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इस साल मक्के का उत्पादन 15-20% बढ़ने की उम्मीद है। पिछले 3 सालों में मक्के के दाम 30% तक बढ़ चुके हैं। एथेनॉल पॉलिसी से मक्के को फायदा हुआ है। एथेनॉल मांग 20% बढ़ी, पोल्ट्री की मांग 5-7% बढ़ी है।

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