Crude Oil: क्रूड ऑयल की कीमतों में 9 अक्टूबर को नरमी दिखी। ब्रेंट क्रूड गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एक दिन पहले यह 105 डॉलर के पार चला गया था। पिछले कई हफ्तों से ब्रेंट क्रूड का प्राइस ज्यादातर 100 डॉलर के ऊपर बना रहा है। इसके हाई लेवल पर बने रहने का अनुमान है।
दिसंबर तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रह सकती हैं
कई ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि क्रूड ऑयल की कीमतें दिसंबर तक हाई लेवल पर बनी रह सकती हैं। इसकी वजह यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को हमले का डर सता रहा है। मैक्सिको की खाड़ी में उत्पादन में बाधा आ रही है। इसका असर सप्लाई पर पड़ रहा है।
ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद थोड़ा नरम
8 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड में 5.5 डॉलर का उछाल आया था। इससे प्राइस कुछ समय के लिए 105 डॉलर प्रति बैरल के पार चल गया था। हालांकि, कुछ समय बाद यह 103-104 डॉलर तक आ गया। क्रूड में नरमी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान है कि अमेरिका ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि 3 नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस से पहले अमेरिका ईरान पर हमले नहीं करेगा।
नए प्रतिबंधों से ईरान की ऑयल एक्सपोर्ट क्षमता पर असर
इस बीच, अमेरिका ने कुछ ईरानी नागरिकों, कंपनियों, पेट्रोकेमिकल्स और दूसरे प्रोडक्ट्स पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसका असर क्रूड एक्सपोर्ट करने की ईरान की क्षमता पर पड़ा है। कुछ बैंकों और ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि दिसंबर तिमाही में ब्रेंट क्रूड का प्राइस 89 से 100 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। हालांकि, अगले साल यह 80-90 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।
मैक्सिको की खाड़ी में क्रूड और गैस का उत्पादन प्रभावित
मैक्सिको की खाड़ी में फिलहाल 25 फीसदी क्रूड ऑयल और 16 फीसदी नेचुरल गैस का प्रोडक्शन ठप पड़ा हुआ है। प्रोडक्शन में रुकावट के बीच कमोडिटी ट्रेडर वितोल (Vitol) ने कहा है कि अगर सऊदी अरब या ईरान शिप-टू-शिप ट्रांसफर में बाधा आती है तो क्रूड ऑयल का भाव दोगुना यानी 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि फ्रेट कॉस्ट पहले ही 2 डॉलर से बढ़कर 35 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है।
क्रूड के हाई लेवल पर बने रहने से बढ़ेगी भारत की मुश्किल
क्रूड प्राइस का हाई लेवल पर बने रहना भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतें बढ़ने पर भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। पहले से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कॉस्ट से कम प्राइस पर पेट्रोल और डीजल बेचने से रोजाना करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पहले ही चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं।
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