अनियमित बारिश के कारण उत्पादन घटने की आशंका, मसालों की कीमत में आया उबाल

जीरे की कीमते इस साल के शुरुआत से ही तेजी के मूड़ में है। उंझा मंडी में 19 जून को जीरे का भाव 50,000 रुपये प्रति क्विंटल ऊपर चला गया जबकि एनसीडीईएक्स पर 18 जुलाई को इसका भाव 60,000 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर चला गया था। जून महीने में इसकी खुदरा महंगाई दर 74.1 फीसदी रही जबकि थोक महंगाई दर 95.7 फीसदी रही

अपडेटेड Jul 29, 2023 पर 12:10 PM
जनवरी 2023 के बाद से मसालों के भाव में नरमी देखने को मिली थी। जनवरी 2023 में मसालों के भाव में सालाना आधार पर 21 फीसदी की महंगाई थी।

सब्जियों के भाव में आग लगने के बाद अब मसालों में उबाल की आशंका नजर आ रही है। पिछले साल के मुकाबले कुछ अहम मसालों के भाव में डबल डिजिट की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसमें भी जीरा का भाव सबसे ज्यादा तेजी दिखा रहा है। पिछले महीने जीरा का भाव सालाना आधार पर 75 फीसदी ज्यादा नजर आ रहा था। अनियमित मौसम और उत्पादन में गिरावट मसालों के भाव में तेजी की मुख्य वजह है। जानकारों का कहना है कि इनके भाव में आगे भी तेजी जारी रहने की संभावना है। क्योंकि अब स्थितियां अगले कैलेंडर ईयर में भी उभरती दिखेगी।

Suumaya Agro के दीपक पारिख का कहना है कि जीरा साल में एक बार होने वाली फसल है। इस साल जीरे की फसल को 30-40 फीसदी का नुकसान हुआ है। बेमौसमी बारिश और ओलोवृत्त कारण हल्दी जैसी तमाम फसलों के बुआई क्षेत्र में भारी गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह राजस्थान के धनिया उत्पादन क्षेत्रों में बिपरजॉय तूफान के कारण भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश और तेलगाना के अनियमिल वर्षा के कारण मिर्ची उत्पादन में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।

गौरतलब है कि जनवरी 2023 के बाद से मसालों के भाव में नरमी देखने को मिली थी। जनवरी 2023 में मसालों के भाव में सालाना आधार पर 21 फीसदी की महंगाई थी। लेकिन उसके बाद से इसमें गिरावट आई थी। हालांकि पिछले महीने से मसालों के भाव एक बार फिर से तेजी पकड़ते नजर आए है। और जून में इनमें 19.2 फीसदी की महंगाई दर्ज की गई। जो मार्च महीना का हाइएस्ट लेवल है।


जीरे में उबाल की क्या है वजह

गौरतलब है कि जीरे की कीमते इस साल के शुरुआत से ही तेजी के मूड़ में है। उंझा मंडी में 19 जून को जीरे का भाव 50,000 रुपये प्रति क्विंटल ऊपर चला गया जबकि एनसीडीईएक्स पर 18 जुलाई को इसका भाव 60,000 रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर चला गया था। जून महीने में इसकी खुदरा महंगाई दर 74.1 फीसदी रही जबकि थोक महंगाई दर 95.7 फीसदी रही।

कीमत में बढ़ोतरी की मुख्य वजह उत्पादन में गिरावट रही है। अधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जीरे का उतापदन 2019-20 के 9.12 लाख टन से घटकर 2020-21 में 7.95 लाख और 2021-22 में 7.25 लाख टन पर आ गई। बेमौसमी बरसात के कारण 2022-23 के फसली सीजन में भी जीरे की बुआई क्षेत्र में कमी आई है। ऐसे में हमें जल्दी ही जीरे बढ़ते भाव से निजात मिलने की संभावना नहीं है।

दीपक पारिख का कहना है कि अगले 3 महीनों में मसालों के भाव में हमें कम से कम से 15 फीसदी की और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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