3 तारीख से नवरात्रि है और 1 नवंबर को दिवाली। ऐसे में खाने के तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। सरकार ने भले ही कंपनियों को दाम ना बढ़ाने को कहा हो, लेकिन कुछ तेलों के दाम 1 महीने में 15% तक बढ़ गए हैं। बता दें कि सरसों के दाम 10 फीसदी , पाम ऑयल के दाम 15 फीसदी चढ़े है। जबकि सोयाबीन ऑयल के दाम 8 फीसदी और सनफ्लावर ऑयल के दाम 10 फीसदी बढ़े है।
इस बीच खबर है कि महाराष्ट्र में सोयाबीन, कॉटन किसानों को सब्सिडी मिलेगी। राज्य सरकार 5000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सब्सिडी देगी। प्रति किसान अधिकतम 10000 की सब्सिडी मिलेगी। राज्य में उत्पादन बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र सरकार सब्सिडी देगी।
देश में कैसी है तिलहन फसलों की बुआई, कैसी है फसल? और कैसा रहेगा उत्पादन? इन सब पर बात करते हुए सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Solvent Extractors Association of India) के ईडी डॉ. बीवी मेहता (B V Mehta) ने कहा कि तेलों के दाम बढ़ने से किसानों को फर्क पड़ता है। बढ़ते तेल के दाम पर ड्यूटी का इंपेक्ट देखने को मिलता है। पिछले 15 दिन में दाम बढ़े है। डॉ. बीवी मेहता ने आगे कहा कि अब तेल की दाम नहीं बढ़ेंगे। पाम, सनफ्लावर का इंपोर्ट काफी हुआ। कुल इंपोर्ट 160 लाख टन करीब होगा । सभी कमोडिटी के भाव बढ़े है।
पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार का कहना है कि इंटरनेशनल मार्केट से तेल की कीमतों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। भारत सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी में इजाफा किया जाने का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिल रहा है। पिछले 15-20 दिनों में खाने के तेल की कीमतों में बढ़त देखने को मिली है।
मनोज कुमार ने आगे कहा कि ऑयल सीड्स की कीमतें फेस्टिव सीजन में आगे भी बढ़ सकती है। मंडियो में सोयाबीन की कीमतों में मिनियम सपोर्ट लेवल के ऊपर जा सकती है। वहीं खाने के तेलों में आई बढ़त भी आगे स्थिर रह सकती है।