Gold Siver Price Outlook: अगर आप इस हफ्ते सोने या चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो सही फैसला लेने के लिए बाजार के रुख को समझना बेहद जरूरी है। आपको बता दें कि एक सितंबर यानी मंगलवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तर पर रहने के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में हल्की बढ़त देखने को मिली। हमारी सहयोगी सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक कॉमेक्स पर सोना 0.27% की तेजी के साथ $4493।70 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था जबकि चांदी 0.63% बढ़कर $66.64 प्रति औंस पर पहुंच गई।
इससे पहले सोमवार को जब निवेशकों ने इस महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं पर दांव लगाना शुरू कर दिया था को सोने पर बिकवाली का दबाव देखा गया था। सोमवार को स्पॉट गोल्ड 0.4% गिरकर $4,433.19 प्रति औंस और अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.1% घटकर $4481.50 पर आ गया था।
सोने और चांदी पर क्यों बन रहा है दबाव?
फिलहाल सोने की कीमतों के लिए सबसे बड़ी रुकावट अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 4.78% पर पहुंच गई है। ये करीब 20 महीनों का इसका उच्चतम स्तर है। ऊंचे बॉन्ड यील्ड की वजह से सोना रखने की अपॉर्च्युनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है क्योंकि सोने से कोई ब्याज आय नहीं मिलती।
फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की हालिया टिप्पणियों के बाद बाजारों में सितंबर में फेड रेट हाइक की उम्मीदें बढ़ गई हैं। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें रहने से सोने पर दबाव बनता है क्योंकि फिर निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों की तरफ रुख करना ज्यादा मुनासिब समझते हैं।
कच्चे तेल में उछाल ने बढ़ाई उलझन
कीमती धातुओं के लिए कच्चा तेल भी एक जरूरी फैक्टर है। अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से शुरू हुई सैन्य कार्रवाई के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई में बाधा की चिंताओं से ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 2.71% की बढ़त के साथ $90.49 प्रति बैरल पर बंद हुआ।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से महंगाई बढ़ सकती है। इससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। यह स्थिति सोने के लिए दोहरी चुनौती पेश करती है। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ाते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऊंची महंगाई और ब्याज दरों की उम्मीदें बॉन्ड यील्ड को बढ़ाकर सोने की कीमतों पर दबाव डालती हैं।
फिर भी क्यों नहीं गिर रहा सोना?
तमाम दबावों के बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग सोने को सहारा दे रही है। अमेरिका और ईरान के तनाव से वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल और शेयर बाजारों पर दबाव की वजह से निवेशक हेजिंग के लिए सोने की ओर रुख कर रहे हैं।
अगस्त का महीना सोने के लिए बेहतरीन रहा। अगस्त के दौरान स्पॉट गोल्ड में करीब 9.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये जनवरी के बाद से इसका सबसे मजबूत मंथली परफॉर्मेंस है। इसलिए हालिया गिरावट को किसी बड़े ट्रेंड बदलाव के बजाय एक बड़े उछाल के बाद के करेक्शन के रूप में देखा जा रहा है।
इस हफ्ते कैसा रहेगा आउटलुक और क्या है एक्सपर्ट की सलाह?
चालू हफ्ते में सोने-चांदी की दिशा मुख्य रूप से तीन फैक्टर पर डिपेंड करेगी। अमेरिकी ब्याज दर की उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमतें और आर्थिक आंकड़े। इस हफ्ते के अंत में आने वाली अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। अगर लेबर मार्केट के आंकड़े उम्मीद से मजबूत आते हैं तो ब्याज दरें बढ़ाने का पक्ष मजबूत होगा। इससे सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं कमजोर आंकड़े दरों में कटौती की उम्मीदों को फिर से जगा सकते हैं। भारतीय निवेशकों के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी मायने रखेगी क्योंकि कमजोर रुपया घरेलू बाजार में सोने के दाम ऊंचे बनाए रख सकता है।
रिद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी का मानना है कि बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। उन्होंने अमेरिकी पेरोल रिपोर्ट से पहले डेटा-रिच अवधि में प्रवेश करते समय सतर्कता बरतने और इस हफ्ते के लिए बाय ऑन डिप्स यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने का सुझाव दिया है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।