क्रूड ऑयल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं। 21 अक्तूबर यानी बुधवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चल रहा था। डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव भी 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब था। गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि क्रूड ऑयल, यूरोपीय नेचुरल गैस और एग्रीकल्चरल मार्केट्स में कीमतों में अगले साल भी तेजी जारी रह सकती है।
इन वजहों से क्रूड की कीमतों हाई लेवल पर रह सकती हैं
Goldman Sachs ने 20 अक्तूबर की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, एनर्जी और एग्रीकल्कर कमोडिटीज की सप्लाई में दिक्कत और प्रतिकूल मौसम के बढ़ते खतरे की वजह से 2027 में भी कीमतें हाई बनी रह सकती हैं। इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। तब से कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा है।
गल्फ में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान से सप्लाई बाधित
दिग्गज अमेरिकी बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले बढ़े हैं। गल्फ देशों में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को हमलों से काफी नुकसान पहुंचा है। उधर, यूरोप में इस बार सामान्य से ज्यादा ठंड पड़ने का अनुमान है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिख सकता है। ठंड में यूरोप में एनर्जी की मांग बढ़ जाती है।
सप्लाई बढ़ने पर क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर तक गिर सकती हैं
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मिडिल-ईस्ट से सप्लाई बढ़ती है तो क्रूड की कीमतों में नरमी आ सकती है। ऐसे में इस साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड का प्राइस गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। लेकिन, लंबे समय तक सप्लाई कम रहने पर क्रूड का ऑउटलुक उलट सकता है। ब्रेंट क्रूड का भाव 2027 की शुरुआत में 140 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। 2027 में इसका एवरेज प्राइस 125 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है।
गल्फ में रोजाना उत्पादन अब भी फरवरी 2026 के लेवल से कम
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, गल्फ में क्रूड का रोजाना उत्पादन 50 लाख बैरल से कम बना हुआ है, जो फरवरी 2026 के लेवल से कम है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड ऑयल की कीमतों का असर शेयर और बॉन्ड्स बाजारों पर भी पड़ा है। उधर, रूस और यूक्रेन की लड़ाई का असर एग्रीकल्चर कमोडिटी की कीमतों पर पड़ा है। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स बीते एक साल में 19 फीसदी उछला है।
अल-नीनो के मजबूत होने पर कई इलाकों में सूखे और बाढ़ का खतरा
इस रिपोर्ट में अल-नीनो के खतरों के प्रति आगाह किया गया है। इसमें कहा गया है कि अल-नीनो मजबूत हो रहा है, जिससे 'सुपर अल-नीनो' की स्थितियां बनने की संभावना 81 फीसदी से ज्यादा हो गई है। मौसम के पैटर्न में बदलाव का बड़ा असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। इससे प्रमुख फसल उत्पादक देशों में सूखे और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।