सरकार ने 16 सितंबर से शुरू 15 दिनों की अवधि के लिए पेट्रोल, डीजल और ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स घटा दिया है। एक सरकारी आदेश के मुताबिक, डीजल के एक्सपोर्ट पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की दर अब 20 रुपये प्रति लीटर है, जो पहले 25 रुपये प्रति लीटर थी। ATF के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 19 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 15 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 1.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 0.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि ड्यूटी में ये बदलाव 16 सितंबर से लागू होंगे। मंत्रालय ने यह भी कहा कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इससे पहले 1 सितंबर को सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर विंडफॉल गेन्स टैक्स बढ़ाया था, जबकि ATF पर घटाया था। डीजल के एक्सपोर्ट पर SAED और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की दर 24 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 25 रुपये प्रति लीटर की गई थी। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी को 1 सितंबर से शून्य से बढ़ाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था। ATF के एक्सपोर्ट पर SAED को 19.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर किया गया था।
क्या है विंडफॉल गेन्स टैक्स
अगर ऑयल कंपनियां 75 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा पर कच्चे तेल की बिक्री करती हैं, तो इससे हासिल होने वाले प्रॉफिट पर विंडफॉल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं डीजल, ATF और पेट्रोल के निर्यात के लिए यह लेवी तब लागू होती है, जब मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है। पिछले दो सप्ताह में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर 15 दिनों पर विंडफॉल गेन्स टैक्स की रेट का रिव्यू किया जाता है। बता दें कि कच्चे तेल को जमीन और समुद्र से निकाल कर रिफाइन किया जाता और इसे पेट्रोल, डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) में कनवर्ट किया जाता है।
मार्च 2026 से फिर लगने लगा है यह टैक्स
भारत ने विंडफॉल गेन्स टैक्स सबसे पहले जुलाई 2022 में लागू किया था। फिर 2 साल बाद दिसंबर 2024 में इसे हटा दिया। लेकिन फिर फरवरी 2026 में ईरान के खिलाफ शुरू हुए अमेरिका-इजराइल युद्ध से तेल की कीमतों में तगड़ा उछाल आया। इसे देखते हुए मार्च 2026 में यह लेवी फिर से लागू की गई।