भारत की सबसे बड़ी ज्वैलरी कंपनी तनिष्क ( Tanishq)और दक्षिण अफ्रीकी-ब्रिटिश हीरा कंपनी डी बीयर्स ग्रुप ((De Beers)ने बुधवार को भारत में नैचुरल डायमंड के कारोबार बढ़ावा देने के लिए तीन साल के रणनीतिक सहयोग का एलान किया है। इस पर दोनों कंपनियों की तरफ से आए एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ते मध्यम वर्ग और स्थायी मूल्य वाले आभूषण पसंद करने वाले समझदार उपभोक्ताओं के साथ भारतीय बाजारों प्राकृतिक हीरे के आभूषणों की मांग हाल ही में बढ़ी है और अब यह वैश्विक मांग का 11 फीसदी हो गई है। भारत ने प्राकृतिक हीरे की खपत में चीन को पीछे छोड़ दिया है और अब वह अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है।
इस बयान में आगे कहा गया कि भारत में हीरे की खरीद की दरें अमेरिका जैसे परिपक्व बाजारों की तुलना में काफी कम हैं, इसलिए यह भारत में प्राकृतिक हीरे के आभूषणों के लिए और अधिक विकास को गति देने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। दोनों पक्ष ट्रेसेबिलिटी पर सहयोग करने के अवसरों और डी बीयर्स की स्वामित्व वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने के अवसरों के बारे में भी बातचीत कर रहे हैं।
इसी पर सीएनबीसी-आवाज ने बात की डी बीयर्स की सीईओ सैंड्रिन कॉन्सिलर (Sandrine Conseiller) और टाइटन (Titan) के सीईओ, ज्वेलरी डिवीजन अजय चावला (Ajoy Chawla)से एक खास बातचीत की। इस बातचीत में डी बीयर्स की सीईओ सैंड्रिन कॉन्सिलर ने कहा कि कंपनी के लिए भारत एक प्रमुख बाजार है। भारत दुनियाभर में हीरे एक्सपोर्ट करता है। हीरों की कटिंग, पॉलिशिंग का सबसे बड़ा हब है। भारत में हीरों का बाजार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कारोबार के लिए भारत में कई संभावनाएं हैं। भारत दुनिया के लिए उदाहरण बन सकता है।
टाइटन के सीईओ, ज्वेलरी डिवीजन अजय चावला ने कहा कि भारत में अभी हीरों की मांग काफी सीमित है। भारत में सिर्फ 10 फीसदी लोग की हीरा खरीदते हैं। ज्वेलरी इंडस्ट्री में हीरों के गहनों की 12 फीसदी हिस्सेदारी है। तनिष्क का हीरों के गहनों के बाजार में 30 फीसदी हिस्सा है। हीरों के गहनों के सेगमेंट में काफी कुछ करना बाकी है। देश में हीरों के गहनों की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है।