सरकार इंडियन ऑयल के ओएफएस को सफल मान रही है, लेकिन अगर एलआईसी नहीं होता तो शायद आईओसी के ओएफएस का सफल होना मुश्किल हो जाता। सरकार ने ओएफएस के जरिए 9379 करोड़ रुपए जुटाएं है, जिसमें से 90 फीसदी हिस्सा एलआईसी ने खरीदा है। जबकि ओएफएस 1.18 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ है। ओएफएस में ऑफर किए गए 24 करोड़ 28 लाख शेयरों में से एलआईसी ने 20 करोड़ 87 लाख शेयर खरीदे हैं। इस खरीद के बाद कंपनी में एलआईसी की हिस्सेदारी बढ़कर 11.11 फीसदी पहुंच गई है।
