दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन ने एक निचली अदालत के अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस आदेश में कंपनी के लेंडर्स को वधावन की ओर से दिए गए सेटलमेंट ऑफर पर विचार नहीं करने की छूट दी गई थी।

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन ने एक निचली अदालत के अंतरिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस आदेश में कंपनी के लेंडर्स को वधावन की ओर से दिए गए सेटलमेंट ऑफर पर विचार नहीं करने की छूट दी गई थी।
वधावन की ओर से दायर याचिका में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) के अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है। इसमें नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) के उस आदेश पर रोक लगाई गई थी जिसमें लेंडर्स को कपिल वधावन की ओर से दिए गए लगभग 91,000 करोड़ रुपये के सेटलमेंट ऑफर पर विचार करने के लिए कहा गया था।
NCLAT ने पिछले महीने अंतरिम आदेश में कहा था, "हमें नहीं पता कि दूसरे सेटलमेंट ऑफर (कपिल वधावन की ओर से दिए गए) पर एडमिनिस्ट्रेटर और CoC से जल्दबाजी में विचार करने को क्यों कहा गया है। रेगुलेशंस के तहत एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी होने के बाद इसके लिए कारण होने चाहिए। यह मामला ऐसी जगह पर पहुंच गया है जहां रिजॉल्यूशन प्लान को अप्रूवल दिया जा चुका है और यह फैसला करने वाली अथॉरिटी के सामने है।"
इसके साथ ही NCLAT ने NCLT के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें लेंडर्स से सेटलमेंट ऑफर पर 10 दिनों के अंदर विचार करने के लिए कहा गया था।
वधावन ने NCLT में दलील दी थी कि यह ऑफर इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत मामला वापस लेने के आवेदन से पहले का कदम है। हालांकि, उनके इस दावे को एडमिनिस्ट्रेटर और DHFL के लेंडर्स ने गलत बताया था।
लेंडर्स की ओर से पहले ही DHFL को एक "फ्रॉड" एकाउंट घोषित किया जा चुका है और इस वजह से कपिल वधावन कोई रिजॉल्यूशन प्लान जमा करने के लिए पात्र नहीं हैं।
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