फूड सेफ्टी रेगुलेटर एफएसएसएआई ने नूडल्स के क्वालिटी मानकों के ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर दिए हैं, जिनका कंपनियों ने स्वागत किया है। इंस्टैंट नूडल्स और उससे जुड़े प्रोडेक्ट के रेगुलेशन के मकसद से एफएसएसएआई ने ये ड्राफ्ट जारी किया है।

फूड सेफ्टी रेगुलेटर एफएसएसएआई ने नूडल्स के क्वालिटी मानकों के ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी कर दिए हैं, जिनका कंपनियों ने स्वागत किया है। इंस्टैंट नूडल्स और उससे जुड़े प्रोडेक्ट के रेगुलेशन के मकसद से एफएसएसएआई ने ये ड्राफ्ट जारी किया है।
मैगी नूडल्स जैसे विवाद दोबारा ना हों, इसके लिए फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई ने इंस्टैंट नूडल्स को लेकर अलग से गाइडलाइंस का ड्राफ्ट जारी किया है। इसमें साफ कहा गया है कि इंस्टैंट नूडल्स का मतलब है- गेहूं के आटे के साथ चावल का आटा मिलाकर या फिर सिर्फ चावल के आटे से बने नूडल्स। इंडस्ट्री का मानना है कि इस ड्राफ्ट से इंस्टैंट नूडल्स से जुड़े नए प्रोडक्ट लॉन्च करना आसान होगा।
एफएसएसएआई ने इस ड्राफ्ट में ये भी कहा है कि कंपनियां किसी दूसरे अनाज से भी नूडल्स बना सकती हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर स्टार्च, सूखे मेवे, सब्जियां, खाद्य प्रोटीन और यहां तक कि अंडा पाउडर भी मिलाया जा सकता है। हालांकि अगर अंडा पाउडर का इस्तेमाल होता है तो उस प्रोडक्ट को नॉन वेज कैटेगरी में डालना जरूरी होगा।
एफएसएसएआई की ड्राफ्ट गाइडलाइंस से एक बात साफ है कि कंपनियों को नूडल्स बनाने की प्रक्रिया में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी और इससे उन्हें एक बड़ी राहत मिली है।
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