खाद्य तेल उद्योग ने पतंजलि आयुर्वेद पर ग्राहकों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। साथ ही, इन्होंने पतंजलि के कच्ची घानी सरसों तेल के विज्ञापन पर सवाल उठाए हैं। तेल बनाने वाली कंपनियों के संगठन ने फूड रेगुलेटर एफएसएसएआई और विज्ञापनों पर नजर रखने पर संस्था एएससीआई में शिकायत दर्ज कराई है।
बाबा रामदेव पतंजलि के सरसों तेल को 100 फीसदी खरा और दूसरे सभी खाने के तेलों को सेहत के लिए हानिकारक बता रहे हैं। इसके विरोध में एसईए यानी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने विरोध जताया है। इन दोनों संस्थाओं को लिखी चिठ्ठी में खाद्य तेल उद्योग ने पतंजलि के सरसों तेल विज्ञापन को तुरंत हटाने की मांग की है।
एसईए के आंकड़ों के मुताबिक देश में सालाना 200 लाख टन खाद्य तेल की खपत होती है। इसमें से 60 लाख टन घरेलू उत्पादन होता है जबकि बाकी तेल इंपोर्ट किया जाता है। इसमें सरसों तेल का हिस्सा 20 लाख टन सालाना है। वैसे तो, सरसों तेल की मांग दूसरे तेलों के मुकाबले कम है लेकिन इंडस्ट्री का आरोप है कि पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन तेल की बिक्री पर असर डाल सकते हैं।
पतंजलि आयुर्वेद ने एसईए के आरोपों को खारिज कर दिया है। हमारे साथ बातचीत में पतंजलि ने कहा है कि अगर एसईए के आरोपो पर उनसे पूछा जाएगा तो वो तथ्यों के साथ जवाब देगें।