Veterans Unpacked: मैं रिटायर नहीं हुआ, मुझे मेरे बेटे ने निकाल दिया - विजयपत सिंघानिया - veterans unpacked i did not retire i was fired by my son vijaypat singhania | Moneycontrol Hindi

Veterans Unpacked: मैं रिटायर नहीं हुआ, मुझे मेरे बेटे ने निकाल दिया - विजयपत सिंघानिया

रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया ने अपने रिटायरमेंट, कारोबारी वैल्यूज, जिंदगी के सबक और भी कई चीजों पर खुलकर बातचीत की है

अपडेटेड Feb 08, 2021 पर 9:29 AM | स्रोत :Moneycontrol.com
Veterans Unpacked: मैं रिटायर नहीं हुआ, मुझे मेरे बेटे ने निकाल दिया - विजयपत सिंघानिया

पवन लाल

पाठकों के लिएः कॉरपोरेट लीडर्स अपने रिटायरमेंट के बाद किस तरह से जिंदगी जीते हैं? आगे की जिंदगी वे कैसे गुजारते हैं? अपने बेहतरीन कारोबारी सफर में इन्होंने क्या सबक सीखे हैं? नई पीढ़ी के बिजनेस लीडर्स को वे क्या सलाह देना चाहेंगे? वेटरन्स अनपैक्ड में हम ऐसे ही दिग्गजों के इंटरव्यू लेकर आ रहे हैं जो कि अपने कारोबारी सफर को विराम दे चुके हैं और अब रिटायरमेंट की जिंदगी जी रहे हैं। इस सीरीज का मकसद है कि पाठक इन दिग्गजों की जिंदगी भर की समझ को जानें और उससे सबक लें।

विजयपत सिंघानिया रेमंड ग्रुप के चेयरमैन रहे हैं। वे कई भूमिकाओं में रह चुके हैं। वे मुंबई के शेरिफ रहे हैं। इसके अलावा वे एक मैनेजमेंट प्रोफेसर, लेखक और कमर्शियल एविएशन पायलट भी रहे हैं। एयरलाइंस के लिए उन्होंने मुफ्त में फ्लाइट्स की कप्तानी की है।

1980 के दशक में उन्होंने द इंडियन पोस्ट नाम से एक न्यूजपेपर भी शुरू किया था। एक एडवेंचर पायलट के तौर पर उन्होंने एक माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट अकेले चलाकर लंदन से मुंबई का सफर तय किया था और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। यही नहीं वे गर्म हवा के गुब्बारे में बैठकर सबसे ज्यादा ऊंचाई तक पहुंचने का भी रिकॉर्ड बना चुके हैं। 82 साल के सिंघानिया का कहना है कि किसी भी कंपनी को सफल बनाने का नुस्खा कर्मचारियों, स्टेकहोल्डर्स और मैनेजमेंट सभी के एक सामूहिक विजन में भरोसा करने में छिपा है।

मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “अगर आपके लोग आपमें भरोसा ही नहीं करते हैं तो आपका धंधा चलाने का कोई मतलब नहीं है।” पेश हैं इंटरव्यू के अंशः

कारोबार से हटने के बाद से आप क्या कर रहे हैं?

दरअसल, मैं वैसे रिटायर नहीं हुआ जैसे बाकी लोग होते हैं। मुझे जबरदस्ती मेरी कंपनी से निकाल दिया गया था। ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि मैंने अपनी कंपनी, अपनी पूंजी सब कुछ मेरे बेटे को गिफ्ट में दे दिया था। लोग अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन से पूछते थे कि आप किसी शख्स के कैरेक्टर को कैसे आंकते हैं? उनका जवाब आसान था। लिंकन ने कहा, “उन्हें ताकत दे दीजिए और देखिए कि वे कैसे व्यवहार करते हैं।”

खैर, मैंने काफी सारा वक्त कानूनी लड़ाइयां लड़ने और आर्बिट्रेशन में बिताया है और उम्मीद है कि निकट भविष्य में यह सब खत्म हो जाएगा। मैं आजकल तकरीबन हर वक्त अपने वकीलों से बात करता हूं।

आप आजकल किन कामों में व्यस्त रहते हैं?

अपनी जिस जिंदगी के बारे में मैं जानता हूं वह इतिहास बन चुकी है। मैं बांसुरी बजाया करता था। मैं उड़ता था। मैं घोड़ों की रेस में बड़े तौर पर शामिल था। बर्षों तक मैं टर्फ क्लब की कमेटी में रहा और मेरे पास सात-आठ घोड़े थे। इसमें गंदगी घुसने तक मैं इसमें शामिल रहा और मैंने कभी इस गंदगी को साफ करने की कोशिश नहीं की।

दांव लगाने को अवैध घोषित कर दिया गया और चूंकि उस वक्त इस पर भारी टैक्स था, ऐसे में इसमें एक रुपये का खुला काम था जबकि चार रुपये छिपकर लगते थे। इसके बाद यह और खराब हुआ और हर एक आधिकारिक रुपये पर 90 अनधिकृत रुपये लगने लगे। आज के हालात का मुझे पता नहीं है।

कुछ वक्त तक मैंने रेसिंग का लुत्फ उठाया। मुझे संगीत सुनना पसंद है। खासतौर पर मुझे क्लासिकल भारतीय और पश्चिमी संगीत पसंद है। मैं नेटफ्लिक्स पर एक्शन शो भी खूब देखता हूं।

शाम को मुझे एक या दो ड्रिंक्स लेना भी पसंद है। मुझे ओल्ड मोंक रम लेना अच्छा लगता है। आप देखेंगे कि मेरे बार में यही सबसे सस्ती शराब है। मैंने ब्राउन गोल बोतल से शुरुआत की थी। मेरे पास इसी के लायक पैसे हैं, लेकिन मुझे ग्लेन लिवेट भी है। मैं किसी भी दूसरे शख्स जितना खुश हूं। जब आप और ज्यादा हासिल करने की ख्वाहिश करते हैं और चीजें और कम हो जाती हैं। मुझे अपनी नई जीवन शैली में ढलने में काफी वक्त लगा।

गुजरे वक्त में अगर देखें तो क्या हमें ऐसी तीन दिलचस्प घटनाएं या ऐसा कुछ बता सकते हैं जो कि तब से ही आपके साथ टिका रहा हो?

मैंने अपने पूर्ववर्ती जी के सिंघानिया से कुछ चीजें सीखी थीं। नियमित रहने में सख्ती, काम पर अनुशासन, कर्मचारियों को परिवार की तरह से मानना, ये ऐसी चीजें थीं जो मैंने अपने पिता से सीखी थीं।

मेरे पिता ने मुझे यह भी सिखाया था कि जब आप किसी चीज का वादा कर दें तो उससे पीछे नहीं हटें। मैं उन्हें कानूनी दस्तावेज दिखाता था और वे मुझसे कहते थे कि मुंह से कही बात का वजन लिखित दस्तावेज से कहीं ज्यादा होता है। यही चीज मेरी जिंदगी का भी हिस्सा बन गई।

मैं खान अब्दुल गफ्फार खान से भी मिला था जिन्हें हम सब फ्रंटियर गांधी के नाम से भी जानते हैं। मैं अपने अखबार द इंडियन पोस्ट के लिए उनका इंटरव्यू करने गया था। मैं उनसे बहुत प्रभावित था और उम्रदराज होने के बावजूद वे जैसे थे, उन्हें देखकर मैं उनका कायल हो गया था।

सी-सुइट में आप क्या सबसे ज्यादा मिस करते हैं?

मुझे लगता है कि मैंने अपने दौर के दूसरे कारोबारियों के सामने अपने लिए इज्जत हासिल की। और ऐसा मेरे कारोबार करने के तरीके की वजह से था। यह इज्जत इस वजह से नहीं थी कि मेरे पास खूब पैसा था, बल्कि ऐसा मेरी वैल्यूज की वजह से था।

मुझे याद है कि मेरे कारोबार से हटने के बाद भी मैं जिन लोगों से मिलता था उनकी नजर में मेरे लिए सम्मान होता था। 

जब मैं सी-सुइट में था तब इसी चीज ने मेरी जिंदगी में बड़ा फर्क पैदा किया। अगर मैं कुछ कहता था तो लोग उस पर भरोसा करते थे।

मेरे दोस्त नारायण वर्मा, नाना चुड़ासामा ... रविवार की दोपहर जब एक बार ड्रिंक्स के लिए विलिंगडन क्लब गए और वहां किसी बात को लेकर सबकी अलग-अलग राय थी तो नाना ने कहा, “बहस करने का कोई फायदा नहीं है, उस बूढ़े शख्स से पूछो जो कि बेकार की जानकारियों का भंडार है। अगर वह इसे सही कह देता है तो समझना यह सही है।” मुझे वह सब याद आता है। मुझे रेमंड में सीनियर लोगों के साथ अपने आपसी रिश्तों की भी याद आती है।

अगर आपको अपने कॉरपोरेट करियर को फिर से जीने का मौका मिले, तो आप क्या अलग करेंगे?

पहला, मैं अपनी सारी पूंजी अपने जीते जी अपने वारिसों को नहीं दूंगा। मैं अपनी वसीयत में उनके लिए इसे लिख दूंगा। पीछे गुजर चुके वक्त में मैं शायद मैं एक अलग कारोबार करना चाहता, लेकिन मैं जहाज उड़ाने में बेहद मशगूल था।

मेरे नाम पर कुछ विश्व रिकॉर्ड थे और ईस्ट वेस्ट एयरलाइंस, डालमिया एयरवेज, एलायंस एयर और सहारा के लिए बिना किसी तनख्वाह के जहाज उड़ाया करता था। इसमें मैंने काफी वक्त लगाया और मुझे लगता है कि इससे मेरे कारोबार पर बुरा असर पड़ा, लेकिन मैंने खूब मजा किया। 

मैं शाम से लेकर देर रात तक हवाई जहाज उड़ाता था और सुबह काम करता था। कई बार तो ऐसा होता था कि मैं उनींदा होता था और काम करता रहता था। 

यह चीज में बदल सकता था, लेकिन मैं कर नहीं पाया। या तो आप काम कर पाते हैं या फिर आप अपने शौक पूरे कर सकते हैं। मैं हर दिन 8-10 घंटे काम करता था और पांच घंटे उड़ता था। ऐसे में मुझे लगता है कि मेरे कारोबार पर इसका बुरा असर पड़ा। 

कॉरपोरेट दुनिया में आप ऐसे क्या बदलाव देखते हैं जो कि आपके हिसाब से आपके वक्त में बिलकुल अलग थे?

मूल्यों और ईमानदारी की परिभाषा में तब में और अब में बहुत फर्क है। आज वैल्यूज खत्म हो गई हैं। यहां तक कि परिभाषा भी बदल गई है। एक परिवार के तौर पर इज्जत करने की क्षमता खत्म हो गई है। 

जब मेरे पिता मुझे बात करने के लिए बुलाते थे, तो मेरी उनके सामने बैठने की हिम्मत नहीं होती थी। मैं खड़ा रहता था और जब वे अपनी पूरी बात कह लेते थे तब मैं चला जाता था।

उस वक्त सीनियरों, परिवार के बड़ों और पेरेंट्स की भूमिकाओं की एक अलग परिभाषा थी। जिन लोगों ने वह दौर देखा है उनके लिए यह बदलाव काफी परेशान करने वाला है। 

अगर आप अपनी सत्ता किसी और को सौंप देते हो तो आपके हाथ कुछ नहीं रह जाता है। मुझे सत्ता जाने का दुख नहीं है, लेकिन मुझे यह अफसोस है कि मैंने ही इसे खुद से दूर कर दिया।

ताकत आपको यह अधिकार देती है कि आप अंतिम फैसला ले सको, भले ही यह फैसला गलत क्यों न हो। किसी न किसी को तो फैसला लेना ही पड़ता है। साथ ही, कुल मिलाकर मेरे वक्त में भारत एक अच्छी जगह थी। मैं यह नहीं कह रहा कि उस वक्त भ्रष्टाचार नहीं था, लेकिन यह आज के वक्त जितना नहीं था।

आज के दौर का कौन सा बिजनेस लीडर आपको प्रभावित करता है?

मैं रतन टाटा को ज्यादा नहीं जानता, लेकिन मैं उन्हें जितना जानता हूं उसमें मैं उनकी बेहद इज्जत करता हूं। 

मैं जेआरडी टाटा को कहीं बेहतर जानता था और मैं उनसे बहुत ज्यादा प्रभावित था। मेरा उनसे तब वास्ता हुआ जब मैं लंदन से मुंबई अकेले माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट उड़ाकर ला रहा था। 

उन्होंने मुझसे कहा कि मैं अपने लोगों के जरिए हर दिन की मेरी फ्लाइट के बारे में जानकारी के लिए रोज न्यूजपेपर रिपोर्ट भिजवाने की व्यवस्था करूं।

यहां तक कि भले ही वे मुझे बहुत पहले से नहीं जानते थे, लेकिन इससे यह साबित हुआ कि वे एविएशन को लेकर कितने फिक्रमंद थे। 

मैं कुमार मंगलम बिड़ला को भी थोड़ा-बहुत जानता हूं, लेकिन वे भी एक बढ़िया शख्स हैं। हालांकि, वह सबसे बड़े नहीं हैं, लेकिन वे दूसरे ज्यादातर लोगों से हटकर हैं। 

रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए आपने कैसे योजना बनाई थी?

कृपया इसे रिटायरमेंट ना कहें। मैं रिटायर नहीं हुआ था। मुझे मेरे बेटे ने धक्का मारकर बाहर निकाल दिया था। मैंने उसे अपना सबकुछ दे दिया और उसने उसी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया। 

मैं बजाज इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर था और फाइनेंशियल मैनेजमेंट पढ़ाता था, लेकिन इसमें बड़ी मेहनत थी। 45 मिनट के एक लेक्चर के लिए मुझे कई घंटों तक तैयारी करनी पड़ती थी। यह बेहद कठिन था। वो मेरे मूल नियम थे।

उन्हें वो बताइए जो उन्हें पता नहीं था, उन्हें ऐसा कुछ बताइए जो वो जानना चाहते थे और उन्हें उनकी समझ में आने वाली भाषा में बताना पड़ता था।

आप जो ये कमरा देख रहे हैं अब यही मेरी पूरी दुनिया है।

आप युवा लोगों के लिए क्या कहना चाहेंगे?

मैं उनसे कहना चाहूंगा कि अगर आप विस्तार करना चाहते हैं तो अपने आप से अपने कर्मचारियों के प्रति ईमानदार रहिए। यह काम धीरे करिए, जल्दबाजी ठीक नहीं होती। कारोबार को मजबूत बनाइए।

ऐसे काम कीजिए कि आपके लोग आपमें भरोसा करें। अगर आपके लोग आपमें भरोसा नहीं करते तो आपके कारोबार चलाने का कोई मतलब नहीं है। साथ ही खुद को मूर्ख मत बनाइए। यह सबसे मुश्किल काम है। हालांकि, कुछ लोग इसे काफी बढ़िया से करते हैं।

कॉरपोरेट लीडर्स की अगली पौध को आप क्या सलाह देंगे?

पैसे कमाने के कई जरिए हैं। आप नैतिक और अनैतिक दोनों तरीकों से पैसा बना सकते हैं। यह आपको तय करना होता है कि आप कौन सा रास्ता अख्तियार करेंगे। मुझे नहीं लगता है कि आप केवल तभी टिके रह सकते हैं जबकि आप अनैतिक साधनों का इस्तेमाल करें। हालांकि, ये बात अलग है कि मैं निश्चित तौर पर एक बिलकुल अलग पीढ़ी से आता हूं।

लेखक मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार हैं

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First Published: Feb 07, 2021 11:37 AM

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