विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी के दादा ने कभी सिर्फ 2 रुपये प्रति सप्ताह से शुरुआत करके सबसे बड़ी राइस ट्रेडिंग कंपनियों में से एक की स्थापनी की थी। 75 साल बाद यह कंपनी अब एक मल्टी-बिलियन डॉलर कंपनी बन गई है, जिसके कई क्षेत्रों में बिजनेस है। प्रेमजी ने कहा, "यह सब उन्होंने एक सरल से सिद्धांत पर किया और वह था ईमानदारी की सिद्धांत।"
विप्रो के 75 साल पूरे होने के मौके पर प्रेमजी ने "द स्टोरी ऑफ विप्रो" नाम से एक कॉफी टेबल बुक लॉन्च की। विप्रो के 75 साल के सफर में पिछले 53 सालों से अजीम प्रेमजी भी हिस्सा रहे हैं। ऐसे में इस बुक में अजीम प्रेमजी की स्टोरी को भी बताया गया है।
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अजीम प्रेमजी ने बताया कि बाद में उनके पिता मोहम्मद हुसैन हशम प्रेमजी ने दादा की विरासत को संभाला। ट्रेडिंग कंपनी की जिम्मेदारी लेते समय उनकी उम्र 21 साल की थी। प्रेमजी की मां भी चुनौतियों से घबराने वालों में से नहीं थीं और उन्होंने एक अस्पताल बनवाने के लिए काफी लड़ाई लड़ी थी। वह एक क्वॉलिफाइड डॉक्टर थीं।
प्रेमजी ने बताया, "उन्होंने अपनी मां से काफी कुछ सीखा। उन्हें बचपन में किसी चीज के लिए खड़े होना और ईमानदारी के साथ अपनी कोशिशों में निरंतरता रखने की सीख मिल गई थी।" अजीम के पिता मोहम्मद हुसैन हशम प्रेमजी ने 1945 में महाराष्ट्र के अमलनेर से वेस्टर्न इंडिया प्रोडक्ट्स लिमिटेड की स्थापना की थी और जो सब्जियों और रिफाइंड ऑयल का काम करती थी। 1966 में पिता की मृत्यु के बाद प्रेमजी ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई छोड़ और बिजनेस को संभालने वापस देश आ गए हैं।
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उन्होंने अपने पिता और दादा के उलट, बिजनेस को विस्तार करने पर ध्यान दिया और उसे एक एंटरप्राइज की जगह कंपनी में बदल दिया। उन्होंने 1979 में इंफोटेक के क्षेत्र में कदम रखा और बाद में कंज्यूमर केयर, लाइटिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग फर्म्स और जीई हेल्थकेयर के क्षेत्र में उतरे।
सन 2000 में विप्रो ने 1 अरब डॉलर की आमदनी और न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होने की उपलब्धि हासिल की। वित्त वर्ष 2021 में कंपनी की आमदनी 8.1 अरब डॉलर रही थी।
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53 सालों तक कंपनी की अगुआई करने के बाद 31 जुलाई 2019 को अजीम प्रेमजी एग्जिक्यूटिव चेयरमैन की अपनी भूमिका से हट गए और अपना समय परोपकार कार्यों पर लगा दिया। फिलहाल अजीम प्रेमजी के बड़े बेटे रिशद प्रेमजी कंपनी के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन हैं।
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