रिलायंस एडीएजीः कर्ज घटाने की कोशिश

कर्ज के बोझ तले दबी रिलायंस एडीएजी की कंपनियों की नॉन-कोर एसेट बेचने की योजना है।

अपडेटेड Dec 03, 2015 पर 2:43 PM
     
     
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    कर्ज के बोझ तले दबी रिलायंस एडीएजी की कंपनियों की नॉन-कोर एसेट बेचने की योजना है। रिलायंस एडीएजी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस का मार्केट कैप 21,069 करोड़ रुपये का है, जबकि कंपनी पर 38,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। रिलायंस कैपिटल का मार्केट कैप 11,275 करोड़ रुपये का है और कंपनी पर 26,139 करोड़ रुपये का कर्ज है।

    रिलायंस इंफ्रा का मार्केट कैप 12,000 करोड़ रुपये का है और कंपनी पर 25,100 करोड़ रुपये का कर्ज है। रिलायंस पावर का मार्केट कैप 15,134 करोड़ रुपये का है और कंपनी पर 30,780 करोड़ रुपये का कर्ज है।

    कर्ज के बोझ को कम करने के लिए रिलायंस कम्युनिकेशंस की टावर कारोबार से निकलने की योजना है। रिलायंस इंफ्राटेल के जरिए रिलायंस कम्युनिकेशंस टावर कारोबार में है। वहीं रिलायंस कैपिटल की सब्सिडियरी रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस में निप्पॉन हिस्सा बढ़ाएगी। निप्पॉन, रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस में हिस्सा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करेगी।

    रिलायंस इंफ्रा की सीमेंट कारोबार बेचने की योजना है। रिलायंस इंफ्रा का 2017 तक कर्ज मुक्त होने का लक्ष्य है। रिलायंस पावर की इंडोनेशिया में 3 कोल माइंस बेचने की योजना है।

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