फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी को सिक्योरिटीज अपीलैट ट्रिब्यूनल (सैट) से झटका लगा है। सैट ने फाइनेंशियल टेक के खिलाफ सेबी का आदेश बरकरार रखा है। सैट ने फाइनेंशियल टेक को एमसीएक्स में हिस्सेदारी घटाने के लिए 4 हफ्ते का और समय दिया है।

फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी को सिक्योरिटीज अपीलैट ट्रिब्यूनल (सैट) से झटका लगा है। सैट ने फाइनेंशियल टेक के खिलाफ सेबी का आदेश बरकरार रखा है। सैट ने फाइनेंशियल टेक को एमसीएक्स में हिस्सेदारी घटाने के लिए 4 हफ्ते का और समय दिया है।
सैट ने फाइनेंशियल टेक की सेबी के खिलाफ अर्जी खारिज कर दी है। अब फाइनेंशियल टेक को एमसीएक्स में हिस्सा घटाना होगा। दरअसल सेबी ने फाइनेंशियल टेक का फिट एंड प्रॉपर दर्जा खारिज किया था।
सैट ने सेबी के हक में फैसला लेते हुए फाइनेंशियल टेक की याचिका को खारिज कर दिया है। सेबी ने फाइनेंशियल टेक को फिट एंड प्रॉपर नहीं बताते हुए स्टॉक एक्सचेंज में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने का निर्देश दिया था। फाइनेंशियल टेक को स्टॉक एक्सचेंज में पूरी हिस्सेदारी बेचनी होगी।
फाइनेंशियल टेक की एमसीएक्स-एसएक्स और एमसीएक्स-एसएक्स के क्लियरिंग कॉरपोरेशन में हिस्सेदारी है। फाइनेंशियल टेक की वडोदरा कॉरपोरेशन, दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज और एनएसईएल में भी हिस्सेदारी है। फाइनेंशियल टेक की एमसीएक्स-एसएक्स में 5 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन फाइनेंशियल स्टॉक एक्सचेंज में किसी भी कंपनी में हिस्सा नहीं रख सकती। दरअसल वायदा बाजार आयोग एफएमसी ने फाइनेंशियल टेक को एक्सचेंज चलाने के लिए फिट नहीं माना था।
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