महाराष्ट्र, केरल, मध्य प्रदेश में मिला डेल्टा प्लस वैरिएंट, केंद्र सरकार ने जारी की एडवाइजरी

देश में डेल्टा प्लस के वैरिएंट महाराष्ट्र के रत्नागिरी, जलगांव, मध्य प्रदेश और केरल के कुछ इलाकों में पाए गए हैं
अपडेटेड Jun 23, 2021 पर 12:10  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर अभी खत्म भी नहीं हुई कि कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने सरकार के लिए सिर दर्द बढ़ा दिया है।


महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) ने एडवाइजरी जारी की है। इन राज्यों में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीज सामने आए हैं। अब तक 22 केस सामने आ चुके हैं।


स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ( Rajesh Bhushan) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा था कि डेल्टा प्लस वैरिएंट मौजूदा समय में variant of interest है। लेकिन अभी तक इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न के तौर पर क्लासीफाइड नहीं किया गया है। यानी अभी तक यह चिंताजनक वैरिएंट की श्रेणी में नहीं है। डेल्टा प्लस वैरिएंट के मामले महाराष्ट्र के रत्नागिरि, जलगांव और केरल, मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मिले हैं।


केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि वे तत्काल इसके रोकथाम के लिए उपाय करें। जहां डेल्टा प्लस वैरिएंट मिला है वहां टेस्टिंग, ट्रैकिंग और वैक्सीनेशन पर ध्यान देने की जरूरत है। सरकार ने कहा है कि संक्रमित व्यक्तियों के सैंपल तुरंत  INSACOG नामित लैब में भेजे जाएं। ताकि हर दिन टेस्ट किए जा सकें।


भारत समेत दुनिया भर के 80 देशों में डेल्टा वैरिएंट का पता चला है और यह एक चिंताजनक वैरिएंट है। डेल्टा प्लस वैरिएंट भारत के अलावा 9 देशों में पाया गया है। कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट अमेरिका, यूके, पुर्तगाल, स्विजरलैंड, जापान, पोलैंड, नेपाल, चीन, रूस सहित भारत में पाया गया है। हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक भारत में डेल्टा प्लस वैरिएंट के 22 मामलों में 16 महाराष्ट्र के हैं। बाकी मामले केरल और मध्य प्रदेश में हैं। 


हालांकि रिर्सचरो के नजरिए से डेल्टा प्लस एक ऐसा वैरिएंट है जिस पर सबकी रूचि बनी हुई है। बता दें कि रिसर्चर किसी वायरस को वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट और वैरिएंट ऑफ कंसर्न में बांट करके उन पर स्टडी करते हैं। भूषण ने कहा कि मोटे तौर पर, दोनों भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन- डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं, लेकिन वे किस हद तक और किस अनुपात में एंटीबॉडी बना पाते हैं, इसकी जानकारी बहुत जल्द साझा की जाएगी।   


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