क्या भारतीय कंपनियों का M-Cap भारत की GDP से पहले 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा? ये है वजह

भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 60 साल लगे। भारत की GDP वर्ष 2007 में 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची
अपडेटेड May 30, 2021 पर 16:03  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय इक्विटी मार्केट, दोनों ने 3 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को छूने में कामयाबी पाई है। मोदी सरकार ने वर्ष 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने की लक्ष्य रखा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत की GDP से पहले भारतीय कंपनियों की बाजार पूंजी (M-Cap) इस 5 ट्रिलियन डॉलर के जादुई आंकड़े तक पहुंच जाएगा?

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज (Geojit Financial Services) के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रेटिजिस्ट वीके विजयकुमार (VK Vijayakumar) का तो यही मानना है। उन्हें उम्मीद है कि भारत की GDP से पहले भारतीय कंपनियों का m-cap 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 60 साल लगे। भारत की GDP वर्ष 2007 में 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची। वहीं, 1 ट्रिलियन से 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में केवल 10 साल लगे और वर्ष 2017 में देश की GDP 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। जबकि, 2 ट्रिलियन से 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में भारत को केवल 4 साल लगे हैं। लेकिन अब बड़ा यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और इंडिया इंक का m-cap 5 ट्रिलियन डॉलत तक कब पहुंचेगा।

वीके विजयकुमार ने कहा कि शेयर मार्केट को प्रीडिक्ट करना बेहद मुश्किल है और ऐसा करने में अंदाजा भारी अंतर से फेल हो सकता है। उन्होंने कहा कि बिना अंदाजा लगाए ट्रेंड्स पर नजर डालें तो जब भी भारत के मार्केट कैप ने 1 ट्रिलियन, 2 ट्रिलियन और 3 ट्रिलियन के आंकड़े को पार किया है तब मार्केट कैप के मुकाबले GDP के अनुपात ने 1 को क्रॉस किया है, और जब भी ऐसा हुआ है मार्केट में करेक्शन दिखा है।

यह फिर से हो सकता है, क्योंकि वैल्यूएशन के मानक जैसे P/E रेशियो और प्रइस टू बुक रेशियो लाल निशान की तरफ इशारा कर रहे हैं। मार्केट में करेक्शन आने के 2 कारण हो सकते हैं, पहला है अमेरिका में महंगाई बढ़ने से बॉन्ड यील्ड में इजाफा होने का कारण बिकवाली का दबाव और दूसरा कारण है कोरोना का सेकेंड वेव और थर्ड वेव की आशंका।

लेकिन अगर भारत कोविड कर्व को मोड़ने और इस महामारी पर नियंत्रण पाने में कामयाब हो जाता है तो बाजार में नए उत्साह का संचार होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को भी इससे बूस्ट मिलेगा। उन्होंने लॉन्ग टर्म निवेशकों को सलाह दी कि वे शॉर्ट टर्म करेक्शन ने नहीं घबराएं और बाजार में अपना निवेश जारी रखें।

इस वजह से 5 ट्रिलियन तक कंपनियों का M-Cap पहुंचेगा

वीके विजयकुमार ने कहा कि भारतीय कंपनियों का कॉर्पोरेट प्रॉफिट GDP के अनुपात का 2% है, जो कि अपने 5.6% के औसत से अभी काफी नीचे है। लेकिन जैसे ही हालात सामान्य होंगे और इकोनॉमिक साइकिल में विस्तार होगा, कॉर्पोर्ट प्रॉफिट में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और अर्निंग बढ़ेगी। ग्लोबल इकोनॉमी रिबाउंड कर रहा है जिससे IT, Pharma और कमोडिटीज कंपनियों की अर्निंग में बेतहाशा वृद्धि होगी और यह GDP ग्रोथ रेट को काफी पीछे छोड़ देगी।

जैसे ही मार्केट कैप 5 ट्रिलियन की तरफ बढ़ेगा, इंवेस्टर्स का रुझान भारतीय कंपनियों की तरफ होगा। भारतीय कंपनियों का 80% प्रॉफिट केवल 20 बड़ी कंपनियों से आता है, जबकि 1991 में यह केवल 14% था। इन टॉप 20 से कुछ पुरानी PSUs बाहर होंगी और नए कंपनियों की इनमें एंट्री होगी।

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