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इमरान खान फिर अपने मुंह मिया मिट्ठू बने, जानिए इस बार क्या मामला है?

पाकिस्तान की GDP में साल 2019 में 1.9 फीसदी बढ़ी है जिसका श्रेय वह खुद ले रहे हैं
अपडेटेड Jan 23, 2021 पर 11:12  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान हमेशा देश की अर्थव्यवस्था की गिरावट के लिए पहले की सरकारों और कोरोनावायरस को जिम्मेदार बताते रहे हैं। वहीं इमरान खान की सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार का श्रेय खुद लेती है। पीएम इमरान खान और उनकी सरकार के अर्थशास्त्री पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी नागरिकों और दुनिया के सामने अपनी सरकार की खूबियां गिना रहे हैं। 


नवंबर में इमरान खान ने नेताओं और दूसरे लोगों को यह बताया कि अर्थव्यवस्था का मुश्किल दौर खत्म हो गया है और अर्थव्यवस्था रिकवर हो चुकी है। कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ पिछले सात दशक में पहली बार नेगेटिव रही।


प्रधानमंत्री इमरान खान ने घोषणा की है कि हमने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव किया है। पाकिस्तान की GDP में साल 2019 में 1.9 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया था। एक साल पहले पाकिस्तान के GDP की ग्रोथ 5.8 फीसदी रही जो पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा थी।


डॉन में इस पर लिखा गया है कि जब भी आप सरकार के बढ़ते निर्यात के बारे में सुनते हैं तो ध्यान रखें कि उसी जुलाई से दिसंबर की अवधि में निर्यात की तुलना में व्यापार घाटा और भी तेजी से बढ़ा है। 


आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पाकिस्तान भी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। 2020 में यह 10.7% थी तो  2019 में 6.8% रही। साल 2018 में 4.7% थी जब इमरान खान की सरकार सत्ता में आई थी। खाने-पीने की कीमतों में हाल में इजाफा दर्ज किया गया है जो यह संकेत देता है कि यह प्रवृत्ति जारी रह सकती है।


पाकिस्तान खाद्य कीमतों को बढ़ाने से रोकने के लिए हताश प्रयास कर रहा है। उसने गेहूं, चीनी के आयात को भी बढ़ा दिया है जिससे कराची पोर्ट तक जाम हो गया है। पाकिस्तान के सीमेंट निर्यात में पिछले महीने 18 प्रतिशत तक की कमी आई है। पाकिस्तान पर कर्ज भी बढ़ रहा है इसलिए अर्थव्यवस्था दवाब में है। सितंबर 2020 के आखिर तक पाकिस्तान की देनदारिया और कर्ज करीब 44,801 बिलियन पाकिस्तानी रुपये था। यह कर्ज 3 महीने की अवधी के दौरान 245 बिलियन और बढ़ गया था।


इसके अलावा पाकिस्तान के कुल लोन का लगभग 30% बाहरी उधार के माध्यम से प्राप्त होता है। पाकिस्तान को चालू वित्त वर्ष में ऋण और देनदारियों की रूप में 1,200 बिलियन पाकिस्तानी रुपए के आसपास का भुगतान करना है। अभी पाकिस्तान कुल बजट का करीब एक तिहाई लोन सर्विसिंग पर खर्च करता है। पीएम इमरान खान ने लोगों को चालू खाते पर ध्यान केंद्रित करवाया था जो दिसंबर तक लगभग पांच महीने के लिए Surplus में था। इसे पीएम इमरान खान ने सरकार की बड़ी सफलता बताई थी।


सरकार की इस सफलता पर अर्थशास्त्रियों ने कहा है था कि चालू खाता सरप्लस होना शायद Covid-19 महामारी का एक सकारात्मक परिणाम था जिसने आर्थिक गतिविधियों को हल्का कर दिया था। इसी के साथ वैश्विक स्तर पर ते की कीमत कम हो गई थी क्योंकि ईंधन की मांग में गिरावट आई थी।


इमरान सरकार उम्मीद कर रही है कि IMF 6 अरब डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी को दोबारा शुरू करे। फरवरी 2020 में Covid-19 के प्रकोप के बाद इसे रोक दिया गया था।


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