वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) भारतीय क्रिकेट इतिहास के एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जो हमेशा अपनी तेजतर्रार बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि गेंदबाज कैसा था। सभी से निपटने के लिए उनके पास केवल एक ही तरीका था, जोरदार शॉट लगाना! आज तक, उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के सबसे ताबड़तोड़ सलामी बल्लेबाजों (Opener Batsman) में से एक माना जाता है। 2015 में सहवाग ने अपने 16000 से ज्यादा रन और 130 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय विकेट के साथ रिटायर हुए।
मगर आपने कभी सोचा है कि सहवाग के करियर में एक समय ऐसा भी आया, जब 'नजफगढ़ के नवाब' ने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था। Cricbuzz के साथ बातचीत में, सहवाग ने खुलासा किया कि वह 2008 में ऑस्ट्रेलिया टूर के दौरान ODI मैचों से संन्यास लेना चाहते थे, क्योंकि उन्हें तत्कालीन कप्तान एमएस धोनी (MS Dhoni) ने कुछ मैचों के लिए बाहर कर दिया था।
शहवाग ने कहा, "2008 में जब हम ऑस्ट्रेलिया में थे तो मेरे दिमाग में यह सवाल (रिटायरमेंट का) आया था। मैंने टेस्ट सीरीज में वापसी की और 150 रन बनाए।"
उन्होंने आगे कहा, "वनडे में, मैं तीन-चार कोशिशों में इतना स्कोर नहीं कर सका। इसलिए, एमएस धोनी ने मुझे प्लेइंग XI से बाहर कर दिया, फिर मेरे दिमाग में वनडे क्रिकेट छोड़ने का विचार आया। मैंने सोचा था कि मैं केवल टेस्ट क्रिकेट खेलना जारी रखूंगा।"
पूर्व बल्लेबाज ने आगे कहा कि सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने तब उन्हें ये कदम उठाने से रोक लिया था। उन्होंने कहा, "सचिन तेंदुलकर ने उस वक्त मुझे रोका था। उन्होंने कहा, 'यह तुम्हारी जिंदगी का खराब दौर है। अभी रुकिए, इस टूर के बाद घर वापस जाइए, खूब सोचिए और फिर तय कीजिए कि आगे क्या करना है। सौभाग्य से, मैंने उस समय अपने रिटायरमेंट की घोषणा नहीं की।"
2008 में वापस, जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया, तो सहवाग ने लंबे ब्रेक के बाद टेस्ट सेट-अप में शानदार वापसी की थी। वह अनिल कुंबले के नेतृत्व में खेले और प्रदर्शन किया। मगर भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका की एक त्रिकोणीय सीबी सीरीज में उन्हें 10 में से केवल 5 वनडे मैच ही खेलने को मिले।
उन्होंने पहले चार मैचों में 6, 33, 11 और 14 रन बनाए, जिसके बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया। वह 7वें फिक्सचर में मिक्स में लौट आए, लेकिन एक और निराशाजनक आउटिंग (14 रन) के कारण उन्हें बाकी बची सीरीज के लिए बाहर कर दिया गया। भारत ने बेस्ट ऑफ थ्री फाइनल में मेजबान टीम को 2-0 से हराकर इतिहास रच दिया था।