भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह का अब एक और कार्यकाल बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने BCCI को अपने संविधान में संशोधन करने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही BCCI के अध्यक्ष, सचिव और पदाधिकारियों के लिए पहले कार्यकाल के बावजूद लगातार दो और कार्यकाल बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
SC ने BCCI को अपने संविधान में संशोधन करने की अनुमति देते हुए कहा, "हमारा विचार है कि संशोधन मूल मकसद को कमजोर नहीं करेगा। हम प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार करते हैं।" कोर्ट ने कहा, "BCCI द्वारा प्रस्तावित संशोधन हमारे ओरिजनल जजमेंट की भावना को कम नहीं करता है और इसे स्वीकार किया जाता है।"
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और हिमा कोहली ने बुधवार को कहा कि 'आवेदन पर विचार करने के बाद, हमारा विचार है कि प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार किया जाना चाहिए। SG ने कहा है कि एमाइकस क्यूरी की तरफ से प्रस्तावित संशोधन BCCI को मंजूर है।
SC का कहना है कि पदाधिकारियों का लगातार 12 साल का कार्यकाल हो सकता है, जिसमें छह साल स्टेट एसोसिएशन का और छह साल BCCI का, कार्यकाल शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि पदाधिकारियों के पास BCCI में एक पद पर 3-3 साल के लगातार 2 कार्यकाल हो सकते हैं। इसी तरह स्टेट एसोसिएशन में भी ऐसे ही होगा, जिसके बाद कूलिंग-ऑफ पीरियड आएगा।
BCCI के संविधान के अनुसार, जिसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी, "एक पदाधिकारी जिसने स्टेट एसोसिएशन या BCCI (या दोनों) में लगातार दो कार्यकाल तक कोई पद संभाला है, तो वह अगले तीन साल तक बोर्ड में किसी भी पद का चुनाव नहीं लड़ सकता।" तीन साल के इस अंतराल को 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' (Cooling-off Period) कहा जाता है।
वहीं लेकिन अब, एक व्यक्ति पहले स्टेट एसोसिएशन में तीन-तीन साल के दो कार्यकाल के लिए सेवा दे सकता है और फिर कूलिंग-ऑफ के लिए जाने से पहले सीधे दो कार्यकाल के लिए BCCI के सदस्य के रूप में भी चुना जा सकता है।
इससे पहले मंगलवार को बेंच ने मौखिक रूप से कहा था कि कार्यालय में केवल एक कार्यकाल के बाद तीन साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड 'बहुत सख्त' है।