कोरोना वायरस-लॉकडाउन के बाद पहली बार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण (Delhi Air Pollution) खतरनाक स्तर तक बढ़ने लगा है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। ये स्थिति दिल्ली में हर साल आती है और हमेशा ही लोगों की इस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां वातावरण में प्रदूषकों की मात्रा काफी बढ़ गई है, जिससे हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है। हरियाणा और पंजाब में पराली जलाए जाने के चलते राजधानी दिल्ली और NCR के इलाकों में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इस वजह से हवा की गुणवत्ता आठ महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

इस प्रदूषण का मुख्य कारण पंजाब, हरियाणा और आसपास के अन्य राज्यों में पराली जलाया जाना है। दिल्ली सरकार ने केंद्र और संबंधित राज्यों की सरकारों से वायु प्रदूषण की समस्या से निबटने के लिए कार्रवाई करने की अपील की है। केजरीवाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि पराली के धुएं के कारण होने वाला प्रदूषण पूरे उत्तर भारत की समस्या है और अकेले दिल्ली सरकार इसे नहीं सुलझा सकती। हवा की गति कम होने और तापमान कम होने के चलते प्रदूषक तत्त्वों के हवा में जमा होने के कारण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) की वायु गुणवत्ता मंगलवार सुबह बहुत खराब (Very Poor) श्रेणी में पहुंच गई।

इसका कारण हवा की गति कम होना बताया जा रहा है। एक तरफ जहां दिल्ली के लोगों का कहना है कि सरकार को इस समस्या के समाधान के लिए कड़े प्रयास करने चाहिए। तो वहीं दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार इसके लिए पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब में पराली जलने को कारण मानती है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार कहीं ना कहीं इस समस्या के लिए केंद्र सरकार को भी जिम्मेदार मानती है। प्रदूषण को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के दावों को खारिज कर दिया है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया द्वारा मंगलवार को प्रेसवार्ता कर लगाए गए आरोपों के जवाब में अपना पक्ष जारी किया। मंत्रालय ने कहा कि केंद्र ने वायु प्रदूषण कम करने के प्रभावी कदम उठाए हैं। पर्यावरण मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी निष्क्रियता के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया। मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदूषण को समाप्त करने के लिए काम करने में विश्वास करती है। सरकार ने पिछले छह वर्षो में कई वायु प्रदूषण विरोधी पहल की है।

बता दें कि 0 और 50 के बीच AQI (air quality index) को अच्छा (Good), 51 और 100 के बीच संतोषजनक (Satisfactory), 101 और 200 के बीच मध्यम (Moderate), 201 और 300 के बीच खराब (Poor), 301 और 400 के बीच बहुत खराब (Very Poor) और 401 और 500 के बीच गंभीर (Severe) माना जाता है।

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