DATA PROTECTION BILL - दोनों सदनों से पर्सनल डिजिटल पर्सनल डेटा संरक्षण विधेयक (DIGITAL PERSONAL DATA PROTECTION BILL) पास हो चुका है। राज्यसभा में पास होने के एक दिन बाद आज हमारे सहयोगी चैनल सीएनबीसी-आवाज़ के लक्ष्मण रॉय ने DATA प्रोटेक्शनन BILL और अनचाही कॉल जैसे अहम मुद्दों पर टेलीकॉम और IT मंत्री, अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav, Telecom and IT Minister) से एक्सक्लुसिव बात की। इस बातचीत में मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इंडस्ट्री के साथ लंबी बातचीत के बाद ही लैपटॉप, टैब जैसे IT हार्डवेयर के इंपोर्ट पर पाबंदी लगाने पर फैसला लिया गया है। 9 अगस्त को राज्यसभा में ये बिल ध्वनि मत से पारित किया गया। जबकि इसके दो दिन पहले ये बिल 7 अगस्त को लोकसभा से पास हो गया था।
इस बिल से बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल की अहम भूमिका है। पहली बार डेटा प्रोटेक्शन का लीगल फ्रेमवर्क हुआ है। इस बिल से बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। इससे ऐप, संस्थाएं, फर्म के डेटा इस्तेमाल के तरीके में बदलाव आएगा। जिस उद्देश्य के लिए डेटा लिया जाएगा सिर्फ उसी में इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस बिल को तेजी से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
मंत्री ने कहा कि जितनी डेटा की जरूरत हो कंपनियां उतना ही डेटा लेंगी। डेटा का उपयोग होने के बाद उसे डिलीट करना जरूरी है। इस बिल के तहत 4 स्तरों पर डेटा प्रोटेक्शन की व्यवस्था है। JPC इस बिल को देख चुकी है। पिछले 6 वर्षों में इस बिल पर काफी चर्चा हुई है। ड्राफ्ट के लिए कई फर्म और मंत्रालयों से कंसल्टेशन हुआ।
बिल को लेकर 23,666 सुझाव मिले
वैष्णव ने कहा सरकार ने बिल पर सुझाव मंगाये थे। डेटा प्रोटेक्शन बिल को लेकर 23,666 सुझाव मिले। इस बिल से देशवासियों को अधिकार मिले हैं। बिल में हर सेक्टर की जरूरतों का ध्यान रखा गया है। सभी डेटा का वैल्यू होता है। डेटा को अलग-अलग कैटेगरी में डालना कठिन है।
इसके लिए RTI कानून में कुछ बदलाव किए गए हैं। IT हार्डवेयर बनाने वाली कंपनियों से विस्तार से बात की है। इंडस्ट्री से बातचीत के बाद हार्डवेयर IT इंपोर्ट पर लगाम लगेगी।
लैपटॉप आयात प्रतिबंध पर जल्दबाजी में नहीं लिया फैसला
आईटी मिनिस्टर ने कहा कि इस बारे में जल्दीबाजी में कोई फैसला नहीं लिया गया। इंडस्ट्री के साथ बातचीत में जो तय किया गया है वही किया जा रहा है। आईटी हार्डवेयर के मैन्यूफैक्चरर के साथ 8-9 महीने डीटेल डिसकशन हो चुका है। सप्लाई में कोई बाधा आने का डर नहीं है। एक क्लीयर ट्रांजिशन पीरियड पहले से भी प्रस्तावित था अब नोटिफिकेशन के जरिये साफ कर दिया गया है।