Monkeypox Symptoms: बिना विदेश यात्रा के मंकीपॉक्स की चपेट में आया शख्स, जानिए लक्षण और किन चीजों से रहें सतर्क

Monkeypox Symptoms: मंकीपॉक्स वायरस के प्रकोप को देखते हुए WHO ने इसे हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। आइए जानते है कि आखिर क्या है ये मंकीपॉक्स वायरस और इसे कैसे पहचाना जा सकता है

अपडेटेड Jul 26, 2022 पर 8:56 AM
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राजधानी में मंकीपॉक्स का केस मिलने के बाद केंद्र सरकार और सभी राज्य अलर्ट हो गए हैं।

Monkeypox Symptoms: पूरी दुनिया में कोरोना महामारी का प्रकोप अभी पूरी तरह से टला भी नहीं है कि एक और बीमारी ने लोगों की नींद उड़ा दी है। मंकीपॉक्स से दुनिया के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है। भारत में भी इस वायरस ने दस्तक दे दी है। देश की राजधानी दिल्ली में एक ऐसा शख्स मंकीपॉक्स की चपेट में आया है। जिसने विदेश यात्रा भी नहीं की। इस शख्स को बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में टेस्ट में पॉजिटिव रिपोर्ट आई। मंकीपॉक्स के लक्षण करीब 2 हफ्ते बाद नजर आते हैं।

मंकीपॉक्स ने दुनिया के 75 देशों में 16,000 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना लिया है। जिसे देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे हेल्थ इमरजेंसी घोषित (Monkeypox Health Emergency) कर दिया है। भारत में मंकीपॉक्स के 4 मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें 3 केरल में पाए गए हैं और एक दिल्ली में केस दर्ज किया गया है।

जानिए क्या है मंकीपॉक्स


यह एक रेयर जूनोटिक बीमारी है, जो मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण से होती है। यह पॉक्सिविरेडे परिवार से संबंध रखता है। इसमें चेचक की बीमारी पैदा करने वाले वायरस भी होते हैं। यह चेचक से कम गंभीर होता है। वायरस का एक परिवार होता है। उसमें अलग-अलग वायरस और उसके स्ट्रेन होते हैं। जैसे कोरोना वायरस एक परिवार है। इसमें कोरोना के अलग-अलग वायरस यानी स्ट्रेन अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, ओमीक्रोन थे। मंकीपॉक्स वायरस का पहला मामला 1970 में रिपोर्ट किया गया था। मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षा वन क्षेत्रों (tropical rainforest area) में यह रोग होता है।

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मंकीपॉक्स के लक्षण

किसी भी वायरस से संक्रमित होने के बाद उत्पन्न लक्षण को समझना बेहद जरूरी है। इस वायरस से संक्रमित इंसान में फीवर, गले में खराश, सांस में दिक्कत होती है। इसके अलावा चिकनपॉक्स की तरह शरीर में रैशेज और दाने बन जाते हैं, जो पूरे शरीर पर दिखने लगते हैं। दाने का आकार बड़ा होता है। इसमें पस भर जाता है। इसका इनक्यूबेशन पीरियड 5 से 21 दिन का है। यह अपने आप ठीक हो जाता है। सामान्य जनसंख्या में Monkeypox की मुत्यु दर 0 से लेकर 11 फीसदी तक रही है। बच्चों में यह अधिक रहा है। हाल के दिनों में आए मंकीपॉक्स के मामले मृत्यु दर 3 से 6 फीसदी तक रही है।

कैसे फैलता है मंकीपॉक्स

एक मंकीपॉक्स (Monkeypox) से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने पर मंकीपॉक्स फैल सकता है। ऐसे में संक्रमित लोगों को आइसोलेशन में रहना चाहिए। मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। मंकीपॉक्स का वायरस आंख, नाक या मुंह के माध्यम से फैलता है। वहीं संक्रमित जानवरों के काटने से या उनके नजदीक संपर्क में आने से भी फैल सकता है। यह कुत्ते, बिल्ली, बंदर जैसे जानवरों के संपर्क में आए बेडस, कपड़े से भी फैल सकता है। एक संक्रमित इंसान के बहुत करीब जाने, हाथ मिलाने से यह फैल सकता है। सेक्स करने और किस करने पर भी यह वायरस फैल सकता है।

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इलाज

मंकीपॉक्स का कोई इलाज नहीं है, लेकिन चेचक का टीका मंकीपॉक्स को रोकने में 85 फीसदी तक प्रभावी साबित हुआ है। मंकीपाक्स को यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने कम जोखिम वाला वायरस बताया है।

बचाव

मास्क का इस्तेमाल करें और सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें। विदेश यात्रा से आने पर अपनी जांच जरूर कराएं। संक्रमित के संपर्क में आने के बाद साबुन और हैंड सैनेटाइजर से हाथ अच्छे से धोएं। संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, तौलिया इस्तेमाल करने से बचें। संक्रमित जानवर के काटने से, उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ को छूने से बचना चाहिए।

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