निर्मला सीतारमण ने कंपनियों में महिला डायरेक्टर्स की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया

बीएसई और मेटरमायबोर्ड की ओर से आयोजित 'वुमेंस डायरेक्टर्स कनक्लेव 2022' में सीतारमण ने कहा कि आज के समय में पुरुष और महिला एंप्लॉयीज की सैलरी और ट्रीटमेंट में किसी तरह के फर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता

अपडेटेड Sep 16, 2022 पर 5:35 PM
सीतारमण ने कहा कि कुछ सरकारी बैंकों और सरकारी कंपनियों को महिला डायरेक्टर्स की नियुक्ति करनी बाकी है।

फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने 16 सितंबर को कहा कि बोर्ड में जेंडर बैंलेस (Gender Balance) बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बोर्ड में महिला डायरेक्टर्स की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा, "कंपनियों के बोर्ड में जेंडर बैलेंस बनाना जरूरी है लेकिन इससे भी जरूरी है बैलेंस ऑफ आइडिया...कंपनी के डायरेक्टर्स के लिए हमेशा सजग रहना जरूरी है। उन्हें खुद को ग्लोबल और मार्केट फैक्टर्स से अवगत रखना चाहिए।"

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फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा, "महिला डायरेक्टर्स की संख्या बढ़ाना जरूरी है। महिलाओं को क्यों यह साबित करने की जरूरत है कि वे कंपनी को बोर्ड में शामिल होने के योग्य हैं? महिलाओं को संरक्षण की जरूरत नहीं है... कई महिलाओं ने खुद को साबित किया है और उन्हें पहचान मिली है।"

बीएसई और मेटरमायबोर्ड की ओर से आयोजित 'वुमेंस डायरेक्टर्स कनक्लेव 2022' में सीतारमण ने कहा कि आज के समय में पुरुष और महिला एंप्लॉयीज की सैलरी और ट्रीटमेंट में किसी तरह के फर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आज महिलाएं उच्च कौशल और नीरस समझे जाने वाले जॉब्स में आ रही हैं।  यह सोच गलत है कि वे सिर्फ मेहनत-मजदूरी का काम कर सकती हैं। पेमेंट और नीरसता दूर करने पर कंपनियों का फोकस होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "कुछ सरकारी बैंकों और सरकारी कंपनियों को अभी महिला डायरेक्टर्स की नियुक्ति करनी बाकी है। अब भी कुछ लोगों का पूर्वाग्रह महिलाओं के खिलाफ हो सकता है। लेकिन, महिलाओं को कॉर्पोरेट वर्ल्ड में सीमाएं पार करने की जरूरत है।"

फाइनेंस मिनिस्टरर ने कहा, "महिलाएं इनक्लूसिविटी के लिए नहीं कर रही हैं, हम जेंडर पैरिटी की मांग नहीं कर रहे हैं। आप ज्यादा प्रॉफिट चाहते हैं तो मुझे (महिला) मौका दीजिए।" उन्होंने कहा कि बोर्ड में महिलाओं को शामिल करने पर सरकार इससे ज्यादा जोर नहीं दे सकती। इस बारे में दबाव खुद समाज के अंदर से बनाया जाना चाहिए। आखिर में उन्होंने कहा कि कंपनियों में टॉप पॉजिशन पर ज्यादा महिलाओं के नहीं होने के लिए कोई बहाना नहीं बनाया जा सकता। अब हमें हमारी अनदेखी मंजूर नहीं है।

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