अपर्णा यादव (Aparna Yadav) के भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष और दिग्गज नेता शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने कहा कि अपर्णा यादव को समझना चाहिए, उनको परिवार के साथ रहना चाहिए था। शिवपाल ने शुक्रवार को जसवंत नगर विधानसभा सीट से सपा एवं प्रसपा गठबंधन के प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया।
CNN-NEWS18 को दिए एक इंटरव्यू में शिवपाल ने कहा कि अपर्णा यादव को परिवार और समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ रहना चाहिए था, हालांकि उनके बाहर होने से आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों में पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न पर इटावा के जसवंत नगर सीट से नामांकन दाखिल करने से पहले शिवपाल ने अपने पैतृक गांव सैफई में सीएनएन-न्यूज18 से बातचीत में हरिओम यादव और प्रमोद गुप्ता के समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ देने के सवाल पर कहा कि इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
अपर्णा यादव के बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये अपर्णा समझें, उनको समझना चाहिए था और परिवार के साथ रहना चाहिए था। प्रमोद भी जब समाजवादी विचारधारा से जुड़े थे तो थोड़ा सा इंतजार करना चाहिए था।
यह पूछे जाने पर कि क्या अपर्णा के जाने से गलत संदेश गया है? इस सवाल पर शिवपाल ने कहा कि अपर्णा को यह समझना चाहिए था ... उसे परिवार और पार्टी के साथ रहना चाहिए था। प्रमोद गुप्ता को भी और अधिक धैर्य दिखाना चाहिए था क्योंकि वह समाजवादी पार्टी की विचारधारा का हिस्सा थे। उसे भी नहीं जाना चाहिए था।
शिवपाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी एक पुरानी पार्टी है जिसे नेताजी मुलायम सिंह यादव ने स्थापित और पोषित किया था। अखिलेश यादव ने गठबंधन किया है जिसमें हम हैं। सपा की एक विचारधारा है और जब हम उस विचारधारा का पालन करेंगे तो उस विचारधारा की जीत होगी। इसलिए इन निकासों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
दिग्गज नेता ने कहा कि उन्होंने पांच बार सीट जीती है और उनकी नई पार्टी ने इन चुनावों में अखिलेश यादव की सपा के साथ गठबंधन किया है, जिससे 2017 के चुनावों में पार्टी की बहुत जरूरी पारिवारिक एकता वापस आ गई है।
शिवपाल ने आगे कहा कि हम हमेशा साथ रहे हैं लेकिन 2017 के चुनावों में, परिवार में कुछ गलतफहमी थी। पिछली बार की तरह साइकिल सिंबल पर लड़ रहा हूं। मेरा अनुभव इन चुनावों में अखिलेश यादव की मदद करेगा। लोगों से मेरी अपील है कि गठबंधन को बड़ी जीत मिले और 2022 में मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश यादव के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से सरकार बने।