कर्नाटक चुनाव में सबसे अहम हैं ये 5 फैक्टर: अति आत्मविश्वास, जाति का गणित, 40% भ्रष्टाचार, 2,000 रुपए का वादा, मोदी मैजिक
कर्नाटक चुनाव 2023: BJP और कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं से बातचीत के दौरान- कांग्रेस खेमे में अतिविश्वास, जातिगत मैट्रिक्स, BJP पर 40% भ्रष्टाचार का दाग, महिलाओं के लिए कांग्रेस का 2,000 रुपए प्रति माह का वादा और मोदी फैक्टर, इन पांच चर्चाओं को सबसे ज्यादा सुना जाता है। बीजेपी इस हफ्ते प्रदेश की राजधानी में कैंप कर रही है
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अपडेटेड Apr 13, 2023 पर 3:51 PM
कर्नाटक चुनाव में सबसे अहम हैं ये 5 फैक्टर (PHOTO- Moneycontrol Hindi)
कर्नाटक चुनाव 2023: एक महीने से भी कम समय के बवजूद, चुनावी बुखार अभी तक बेंगलुरु में जोर नहीं पकड़ रहा है। भारत की IT राजधानी में किसी भी पार्टी के अभियान और कैंपेन को खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। लेकिन 2024 की बड़ी लोकसभा लड़ाई से पहले यकीनन सबसे अहम राज्य चुनावों (Assembly Elections) से पहले कर्नाटक (Karnataka) में चुनावी गर्मी निश्चित रूप से उबाल मार रही है। News18 ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि BJP और कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं से बातचीत के दौरान- कांग्रेस खेमे में अतिविश्वास, जातिगत मैट्रिक्स, BJP पर 40% भ्रष्टाचार का दाग, महिलाओं के लिए कांग्रेस का 2,000 रुपए प्रति माह का वादा और मोदी फैक्टर, इन पांच चर्चाओं को सबसे ज्यादा सुना जाता है। बीजेपी इस हफ्ते प्रदेश की राजधानी में कैंप कर रही है।
राज्य में "भ्रष्टाचार के प्रति लोगों के गुस्से" को देखते हुए, कांग्रेस में कुछ अति आत्मविश्वास देखा जा सकता है, क्योंकि इसके चलके वो अपनी जीत को आसान मान रही है। BJP खेमा ये बात मानता है कि ये एक "कड़ी लड़ाई" होगी, लेकिन एक नेता ने कहा कि वे पहले से ही 100 से ज्यादा सीटों पर थे और उनका तुरुप का पत्ता - पीएम नरेंद्र मोदी - अभी भी बड़ा उछाल देने के लिए आने वाला है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने News18 को बताया, "कांग्रेस के लिए कर्नाटक जीतना बेहद जरूरी है... नहीं तो 2024 में बीजेपी को रोका नहीं जा सकेगा।" बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कड़े मुकाबले में कांग्रेस अति आत्मविश्वास पर है।
BJP नेता ने कहा, "कांग्रेस का अभियान जल्द ही पटरी से उतर सकता है, क्योंकि उसके पास भीड़ खींचने वाला कोई राष्ट्रीय नेता नहीं है। BJP का अभियान सही समय पर चरम पर होगा, क्योंकि नरेंद्र मोदी बड़े पैमाने पर राज्य का दौरा करेंगे।"
दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि उसने जानबूझकर प्रचार अभियान को स्थानीय रखा है, क्योंकि ये ही उसकी जीत का फॉर्मूला है। कांग्रेस नेता ने तर्क दिया, “हमारा अभियान पूरा हो गया है। अब, हमारे नेता निर्वाचन क्षेत्र लेवल के चुनाव प्रचार पर ध्यान केंद्रित करेंगे।”
जाति मैट्रिक्स और 40% भ्रष्टाचार
कर्नाटक में कई जातियों और उप-जातियों के साथ सबसे जटिल सामाजिक मैट्रिसेस में से एक है। चुनाव अभियान में नजदीक से शामिल एक BJP नेता का मनना है कि भगवा पार्टी के पास यहां बढ़त है। कुछ कांग्रेस नेता भी इस बात को मानेंगे।
मुस्लिम, SC-राइट, कुछ ST और OBC में कुरुबा कांग्रेस का मजबूती से समर्थन कर रहे हैं। ओल्ड म्युरू रीजन में, वोकालिग्गस JD(S) के साथ रहते हैं, क्योंकि एचडी देवेगौड़ा प्रधान मंत्री रहे हैं और एचडी कुमारस्वामी बहुत कम संख्या होने के बावजूद मुख्यमंत्री बने हैं।
एक बीजेपी नेता ने समझाया, “बाकी लगभग सभी जातियां बीजेपी के साथ हैं। SC-वाम से लेकर बोवी तक, ST, लिंगायत, ब्राह्मण, वैश्य, बंट, रेड्डी, बलेजा, लंबानी, वाल्मीकि, मधिगा और दूसरे OBC जैसे मदिवाड़ा, बलिजा और सविता का एक अहम रेश्यो है। सामाजिक मैट्रिक्स ही भारतीय जनता पार्टी को बढ़त देता है।”
ऊपर से, BJP सभी जातियों को अपनी छतरी के नीचे लाने की कोशिश करने के लिए "हिंदुत्व का तड़का" भी लगा रही है। इसके लिए पार्टी राज्य में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैलियों की योजना बना रही है, खासकर तटीय कर्नाटक में।
हालांकि, एक दिग्गज कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि 'हिंदुत्व' की दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल में एक सीमित असर है। ये तब सामने, जब बीएस येदियुरप्पा को भी अपनी पार्टी को हिजाब, हलाल और टीपू सुल्तान जैसे मुद्दों पर ध्यान न देने की सलाह देनी पड़ी। नेता ने कहा, यहां तक कि 4% मुस्लिम कोटा को वापस लेने का नया निर्णय हिंदुत्व को एक मुद्दा बनाने के लिए एक "हताश प्रयास" था।
कांग्रेस को लगता है कि भ्रष्टाचार का मुद्दा इसके बजाय मतदाताओं को BJP के खिलाफ एकजुट कर रहा है, जातिगत बाधाओं को पार कर रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा, "40 प्रतिशत 'PayCM' भ्रष्टाचार अभियान घर-घर पहुंच गया है। आप सड़क पर किसी भी व्यक्ति से बात करें और वह इस बात से सहमत होगा कि सरकार भ्रष्ट है।”
उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस के रणनीतिकार सुनील कानूनगोलू ने पार्टी को कर्नाटक में BJP सरकार के भ्रष्टाचार को "नंबर एक" मुद्दे के रूप में रखने की सलाह दी है। ये जरूरी है, क्योंकि ये एक ऐसा राज्य चुनाव है, जहां कांग्रेस ने टेबल बदल दी है, जो आमतौर पर भ्रष्टाचार के निशाने पर रहने वाली पार्टी है।"
मोदी फैक्टर
आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद के लिए किसी का नाम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन बसवराज बोम्मई ही सत्ताधारी हैं। BJP कर्नाटक को जीतने के लिए पीएम मोदी की लोकप्रियता पर निर्भर है। बीजेपी के एक नेता ने कहा कि पीएम की कई रैलियों की योजना बनाई जा रही है। खासकर उन इलाकों में जहां वह अब तक नहीं गए हैं। बाकी दूसरे स्टार प्रचारक बीएस येदियुरप्पा होंगे और उसके बाद योगी आदित्यनाथ होंगे।
BJP नेता News18 को बताया, “कांग्रेस कर्नाटक में प्रतिस्पर्धा क्यों दे रही है, इसका कारण ये है कि यहां संगठन की कुछ झलक है और सिद्धारमैया में इसका एक जननेता है। लेकिन हमारी सांगठनिक ताकत और हमारे मजबूत जननेता येदियुरप्पा के अलावा BJP को जो मिलने जा रहा है, वो मोदी फैक्टर है, जो अब पूरी तरह से सामने आ जाएगा।”
एक्स फैक्टरः 2,000 रुपये का भत्ता
इस सब के बीच कांग्रेस के अनुसार, जमीन पर काम करने वाला एक प्रमुख मुद्दा है, कर्नाटक में सत्ता में आने पर हर परिवार की महिला मुखिया के लिए पार्टी द्वारा 2,000 रुपये प्रति माह का वादा किया गया है। इसे एक साइलेंट फैक्टर भी माना जा रहा है।
कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उन्हें राज्य भर से सवाल मिल रहे हैं कि उन्हें ये वादा करते हुए "गारंटी कार्ड" कब मिलेंगे, जैसा कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने घोषणा की थी।
कांग्रेस नेता ने कहा, "इससे पता चलता है कि कैसे ये मु्द्दा खूब चल रहा है और इन चुनावों में महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी एक प्रमुख मुद्दा है, जिस पर मीडिया ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा है।" पार्टी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का भी वादा किया है।