Karnataka Election 2023: इन 12 सीटों पर बागी बिगाड़ सकते हैं कांग्रेस का खेल, JDS और BJP भी नहीं चूकेंगे कोई मौका
Karnataka Election 2023: राजनीतिक पंडितों की मानें, तो ये विद्रोही या तो JDS के उम्मीदवार बनकर चुनाव जीत सकते हैं या फिर कांग्रेस (Congress) के उम्मीदवारों की राह मुश्किल कर सकते हैं, क्योंकि इन नेताओं की अपने इलाकों में अच्छी पकड़ माना जाती है। इसके अलावा बीजेपी को भी इनसे फायदा हो सकता है
MoneyControl News
अपडेटेड Apr 08, 2023 पर 9:46 PM
Karnataka Election 2023: इन 12 सीटों पर बागी बिगाड़ सकते हैं कांग्रेस का खेल
Karnataka Election 2023: कांग्रेस (Congress) ने हाल ही में कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election) के लिए 42 उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी की थी। इसके बाद वही हो रहा है, जो राजनीति में होता है, यानी पार्टी को उन लोगों के विद्रोह (Rebel) का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें टिकट नहीं दिया गया है। ये बागी नेता 10 मई को होने वाले चुनाव में 12 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।
ये तो जाहिर कि किसी एक के नुकसान से दूसरी पार्टी को फायदा पहुंचता ही पहुंचता है। The Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे में JDS को इस विद्रोह से लाभ होने की संभावना है, क्योंकि इसने उनमें से कई विद्रोहियों से संपर्क किया है। इतना ही नहीं पार्टी उन्हें अपना उम्मीदवार बना कर मैदान में भी उतार सकती है।
राजनीतिक पंडितों की मानें, तो ये विद्रोही या तो JDS के उम्मीदवार बनकर चुनाव जीत सकते हैं या फिर कांग्रेस के उम्मीदवारों की राह मुश्किल कर सकते हैं, क्योंकि इन नेताओं की अपने इलाकों में अच्छी पकड़ माना जाती है। इसके अलावा बीजेपी को भी इनसे फायदा हो सकता है।
उदाहरण के लिए, चित्रदुर्ग में, पूर्व MLC रघु अचार से शुक्रवार को JDS MLC टीए सरवाना ने संपर्क किया था। अचार के 14 अप्रैल को JDS में शामिल होने की संभावना है।
कांग्रेस ने अभिनेता डोड्डाना के दामाद केसी वीरेंद्र (पप्पी) को टिकट दिया है, जो 2018 के चुनाव में JDS के उम्मीदवार के रूप में हार गए थे। उसी विधानसभा क्षेत्र से एक और उम्मीदवार एसके बासवराज को भी कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया।
करूर में नौकरी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व विधायक वाईएसवी दत्ता को टिकट नहीं दिया गया है। दत्ता अपने अगले कदम के बारे में फैसला करने के लिए रविवार को अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे।
TNIE ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि वह JDS में वापस जा सकते हैं। सूत्र ने कहा कि CLP नेता सिद्धारमैया की दत्ता के साथ बातचीत पर ही ये निर्भर करता है कि कांग्रेस उन्हें पार्टी में कैसे बरकरार रखेगी।
दत्ता के मामले में एक पेंच ये भी फंस रहा है कि पिछले दिनों उनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि अगर कांग्रेस सत्ता में वापस आती है, तो KPCC अध्यक्ष डीके शिवकुमार के सीएम बनने की संभावना नहीं है। इससे उनकी संभावनाएं खराब हो सकती हैं। कांग्रेस ने कुरुबा के केएस आनंद को टिकट दिया है, जो पिछले चुनाव में हार गए थे।
पार्टी में बगावत के लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार?
पूर्व DCM जी परमेश्वर के घरेलू मैदान में दिग्गज नेता एस शफी अहमद के इस्तीफे से कांग्रेस को झटका लगा है। उनके दामाद और पूर्व विधायक रफीक अहमद को टिकट नहीं दिया गया है, जो 2018 के चुनावों में हार गए थे।
परमेश्वर ने तुमकुरु के लिए एक राजनीतिक नौसिखिए, इकबाल अहमद को पसंद किया। सूत्रों ने कहा कि एक दशक पहले जब परमेश्वर KPCC प्रमुख बनने के लिए पूरी तरह तैयार थे, तो शफी ने उनके खिलाफ तत्कालीन AICC अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा था कि वह उन्हें प्रमोट न करें, जिसकी कीमत रफीक को काफी महंगी पड़ी।
कलघाटगी में नागराज चेब्बी पर पूर्व मंत्री संतोष एल लाड को तरजीह दी गई है, जो बगावत कर सकते हैं। बेलूर में, कांग्रेस ने राजशेखर के ऊपर बी शिवराम को चुना। इसी तरह सावदत्ती में विश्वास वसंत वैद्य को सौदाभा चोपड़ा से बगावत का सामना करना पड़ रहा है।
गोकक में, अशोक कडाडी को अशोक पुजारी से विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। कित्तूर में, डीबी इनामदार, जिन्होंने अपने बेटे या बहू के लिए टिकट मांगा था, बाबासाहेब पाटिल, लक्ष्मी हेब्बलकर के लेफ्टिनेंट के खिलाफ काम कर सकते हैं।
यादगीर में चिन्नारेड्डी पाटिल कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार हैं। लेकिन पूर्व मंत्री एबी मलाका रेड्डी की बेटी अनुराग उनके खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। पार्टी में बगावत के लिए अकेले कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसने सभी उम्मीदवारों को 2 लाख रुपए और 5,000 रुपए एप्लीकेशन फीस भरके टिकट के लिए आवेदन करने को कहा था।